धरमजयगढ़ में भी नहीं चाहिए भ्रष्टाचार की कोई दुकान, अधिवक्ता संघ ने लिखा कलेक्टर को पत्र, दी चेतावनी

रायगढ़। तहसीलदार का स्थानांतरण धरमजयगढ़ किए जाने का वहां के भी अधिवक्ता संघ ने विरोध किया है। अधिवक्ताओं का कहना है उन्हें भ्रस्टाचार की दुकान यहां नहीं चाहिए। इस संबंध में संघ की ओर से कलेक्टर को पत्र लिखा गया है।

अधिवक्ता संघ रायगढ़ की ओर से भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान छेड़ा गया है और भ्रष्टाचार के केंद्र बिंदु हैं। रायगढ़ तहसीलदार सुनील अग्रवाल, अधिवक्ताओं की ओर से आंदोलन नही खत्म करने और तमाम संगठनों के साथ-साथ अब भाजपा के भी आंदोलन का समर्थन करने के बाद कलेक्टर ने तत्काल रायगढ़ तहसीलदार सुनील अग्रवाल का स्थानांतरण धर्मजयगढ़ कर दिया है। ऐसे में अधिवक्ता संघ धर्मजयगढ़ की ओर से तहसीलदार के धर्मजयगढ़ स्थानांतरण कार्रवाई पर विरोध जताते हुए कलेक्टर रायगढ़ को पत्र लिखा है कि यदि इस आरोपी तहसीलदार को धर्मजयगढ़ भेजा जाता है तो वहां न केवल अधिवक्ता बल्कि आम जनता भी भारी विरोध करेगी, यह स्थिति किसी भी सूरत में किसी के लिए भी अच्छी नहीं होगी। जाहिर है रायगढ़ अधिवक्ता संघ के साथ पूरे प्रदेश भर के अधिवक्ता एकजुट, एक स्वर में भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई लड़ रहे हैं, ऐसे में एक ही जिले में एक तहसील से दूसरे तहसील तहसीलदार का स्थानांतरण करना अव्यावहारिक है। तहसीलदार सुनील अग्रवाल रायगढ़ जिले के गेरवानी गांव के रहने वाले हैं । इसी जिले के होने के बावजूद उन्हें रायगढ़ जिले में ही तहसीलदार बनाया जाना सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगाता है। सारंगढ़ में पदस्थापना के दौरान इन पर एक क्लीनिक संचालक से रिश्वत लेने का पुख्ता आरोप लगा था । सीसीटीवी में भी भ्रष्टाचार के रुपए लेते कैद हुए थे, जिसके बाद इनका निलंबन भी हुआ था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इन्हें दंड देना तो दूर इन्हें प्रमोशन की तर्ज पर रायगढ़ तहसील में बैठा दिया गया। जहां यह खुलेआम भ्रष्टाचार की दुकान चलाने के आरोपों से लगातार घिरते रहे हैं और आज भी इन आरोपों से इनका पीछा नहीं छूटा है।

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नीरजधर दीवान
नीरजधर दीवान
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