किंग मेकर स्वामी प्रसाद को गुमनाम से प्रत्याशी ने तबियत से हराया, चुनाव के पहले हिरन की तरह फुदक रहे थे स्वामी, अब सामने है अस्तित्व का संकट

डेमोक्रेसी डेस्क। चुनाव के पहले अपने-आपको किंग मेकर बताकर हिरन की तरह उछलकूद करने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य को एक गुमनाम से प्रत्याशी ने बुरी तरह से पराजित कर दिया है। भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र कुशवाहा ने उसे 45 हजार 633 वोट से पराजित किया है। अब स्वामी के सामने राजनैतिक अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है।

यूपी विधानसभा चुनाव में सबसे ज्‍यादा चर्चित सीटों में से एक फाजिलनगर सीट पर समाजवादी पार्टी के दिग्‍गज नेता स्‍वामी प्रसाद मौर्य को पटखनी देने वाले सुरेन्‍द्र कुशवाहा की चर्चा उत्तर प्रदेश में चारो तरफ हो रही है। हर कोई जानना चाहता है कि आखिर सुरेन्‍द्र कुशवाहा हैं कौन? यह एक ऐसा नाम है जो साल -2022 के पहले राजनीति के गलियारों में कभी नहीं सुना गया था। पेशे से शिक्षक सुरेन्‍द्र कुशवाहा एक कॉलेज में छात्रों को भूगोल पढ़ाते थे। उनका राजनीति से सीधे तौर पर कोई जुड़ाव नही था लेकिन अधिक उम्र हो जाने की वजह से विधायक पिता गंगा सिंह कुशवाहा ने इस बार चुनाव लड़ने से मना कर दिया तो पार्टी ने सुरेन्‍द्र कुशवाहा को मौका दे दिया। पहले ही चुनाव में सुरेन्‍द्र ने स्‍वामी प्रसाद मौर्य जैसी बड़ी सियासी शख्सियत को हराकर न केवल सबको चौका दिया बल्कि स्वामी प्रसाद के राजनैतिक भविष्य ही चौपट कर दिया।

इस जीत ने सुरेन्‍द्र कुशवाहा का कद सियासत में पैर रखते ही बढ़ा दिया है। सुरेन्‍द्र कुशवाहा ने स्‍वामी प्रसाद मौर्य को 45 हजार 633 वोटों के ठीक-ठाक अंतर से हराया है। स्‍वामी को कुल 69710 वोट मिले जबकि बीजेपी के सुरेन्‍द्र कुशवाहा को 115343 वोट मिले है वहीं बसपा के इलियास अंसारी 27 हजार 326 वोट हासिल कर तीसरे स्‍थान पर रहे।

00 बड़ी उम्मीद थी स्वामी प्रसाद को
फाजिलनगर विधानसभा क्षेत्र में करीब 90 हजार मुस्लिम मतदाता, 55 हजार मौर्य-कुशवाहा, 50 हजार यादव, 30 हजार ब्राह्मण, 40 हजार कुर्मी-सैंथवार, 30 हजार वैश्य और लगभग 80 हजार दलित मतदाता हैं। इसी वजह से स्‍वामी प्रसाद मौर्य यहां चुनाव लड़ने आए थे। उन्‍हें मुस्लिम मतदाताओं से बड़ी उम्मीद थी। दरअसल, स्‍वामी का इरादा पहले पडरौना सीट से दावेदारी का था लेकिन पूर्व केंद्रीय मंत्री आर.पी.एन सिंह के कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो जाने की वजह से उन्‍हें वहां अपने समीकरण गड़बड़ाते नज़र आए यही कारण है कि उन्‍होंने फाजिलनगर सीट पकड़ ली। लेकिन यहां भी सुरेन्‍द्र कुशवाहा उनपर भारी पड़ गए। इसका अंदाज उनके सलाहकारों को नहीं रहा होगा।

00 फाजिलनगर से विधायक से सुरेन्‍द्र के पिता
सुरेन्‍द्र कुशवाहा के पिता गंगा सिंह फाजिलनगर सीट से विधायक थे। इस सीट पर बीजेपी, सपा और बसपा के बीच टक्‍कर होती आई है। पिछले दो चुनावों से इस सीट पर बीजेपी के गंगा सिंह कुशवाहा जीतते आ रहे थे। यूपी की 403 विधानसभा सीटों में फाजिलनगर सीट का नंबर 332 वां है। यह सीट देवरिया लोकसभा क्षेत्र में पड़ती है। देवरिया लोकसभा क्षेत्र में कुल पांच विधानसभा क्षेत्र हैं। फाजिलनगर उनमें से एक है। 2017 के चुनाव में फाजिलनगर सीट पर जीत का अंतर बढ़ गया था। तब बीजेपी के गंगा सिंह कुशवाहा ने सपा के विश्‍वनाथ को 41,922 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। उससे पहले 2012 के विधानसभा चुनाव में गंगा सिंह को बसपा के कलामुद्दीन से कड़ी टक्‍कर मिली थी। उस वक्‍त जीत का अंतर 5,500 वोटों से भी कम रहा। विश्‍वनाथ, 2007 में फाजिलनगर सीट से सपा के टिकट पर विधायक बने थे।

Author Profile

नीरजधर दीवान
नीरजधर दीवान
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments