प्रदेश के बिजलीघरों को आयातित कोयला उपयोग करने केंद्रीय बिजली मंत्रालय की धमकी, विरोध में उतरा अभियंता संघ, मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप करने की मांग

बिलासपुर। केंद्रीय बिजली मंत्रालय और मंन्त्री ने राज्य सरकारों को बिजली घरों के लिए आयातित कोयला उपयोग करने के लिए कहा है। आयातित कोयले का उपयोग नहीं करने की स्थिति में राज्यों के बिजली घरों को कोयले कि सप्लाई रोकने की धमकी दी है। बिजली मंन्त्री के इस धमकी से राज्य विद्युत अभियंता संघ ने विरोध किया है और प्रदेश के मुख्यमंन्त्री से इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए पत्र लिखा है।

छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत अभियंता संघ ने मुख्यमंन्त्री को पत्र लिखते हुए कहा है कि ताप विद्युत गृहों में कोयले के संकंट के नाम पर केन्द्रीय विद्युत मंत्रालय ने सभी राज्यों पर आयातित कोयले का उपयोग करने दबाव डाला जा रहा है जो न तो उचीत है और न ही जनहित में है। छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख कोयला उत्पादक राज्यों में से है और यहाँ अधिकतर ताप विद्युत संयंत्र कोयला खदानों के बहुत नजदीक हैं। देश के कई राज्यों में छत्तीसगढ़ से कोयला जाता है ऐसे में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी पर केन्द्रीय विद्युत मंत्रालय द्वारा और स्वयं केन्द्रीय विद्युत मंत्री द्वारा कोयले के आयात हेतु दबाव डाला जाना ना तो कानूनी दृष्टि से उचित है ना ही आर्थिक दृष्टि से और ना ही तकनीकि दृष्टि से तर्कसंगत है। यही नही विद्युत व्यवस्था समवर्ती सूची का विषय है और विद्युत वितरण पूरी तरह से राज्य की व्यवस्था है। संघ ने अपने पत्र में कहा है कि छत्तीसगढ़ में जहाँ देशी कोयले की लागत लगभग रु 2000 / – प्रति टन की होती है वहीं आयातित कोयले की लागत लगभग रु . 15000 / – प्रति टन या उससे भी अधिक होने की आशंका है। इस तरह से आयातित कोयले से उत्पादित बिजली लगभग आठ से दस गुना मंहगा होगा। यदि 10 प्रतिशत भी आयातित कोयले का उपयोग किया गया तब भी बिजली की दर औसतन दो गुना तक की वृद्धि होगी और प्रति यूनिट बिजली की दरों में कम से कम दो रूपये प्रति यूनिट तक की वृद्धि अवश्यंभावी है। जिससे राज्य के उद्योग धन्धो से लेकर कृषि व्यवस्था एवं आमजनों का घर खर्च तक बुरी तरह से प्रभावित होगा। संघ का मानना है कि यदि इस महत्वपूर्ण विषय पर ठोस निर्णय ले कर केन्द्रीय विद्युत मंत्रालय को स्पष्ट जवाब नहीं दिया जाता है तो हमें बिजली की दरों में अभूतपूर्व एवं हाहाकारी वृद्धि के लिये तैयार रहना होगा। तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों ने इन्ही कारणों से कोयला आयात न करने का निर्णय ले भी लिया है। हाल ही में केन्द्रीय विद्युत मंत्री द्वारा यह धमकी भी दी गई कि जो राज्य कोयला आयात नहीं करेंगे उनको देशी कोयले की आपूर्ति कम कर दी जायेगी एवं वे राज्य बिजली संकट भोगने के लिये बाध्य होंगे। तकनीकि तौर पर होना तो यह चाहिये कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में जहाँ कोयला खदाने एवं ताप विद्युत गृह आस – पास स्थित है , यहाँ विद्युत गृहों को भरपूर कोयला उपलब्ध कराया जाये ताकि वहाँ से अतिरिक्त बिजली का उत्पादन कर देश के अन्य हिस्सों में भी बिजली दी जा सके।
यह भी महत्वपूर्ण है कि केन्द्रीय कोयला मंत्रालय के बयानों के अनुसार समस्या कोयले की कमी की नहीं है बल्कि कोयले के परिवहन की है। इसी कारण से हाल ही में रेल मंत्रालय द्वारा बड़े पैमाने पर यात्री गाड़ियों का परिचालन रद्द भी किया गया है। ऐसे में केन्द्रीय विद्युत मंत्रालय को यह बताना चाहिये कि अगर चारों तरफ से जमीन से घिरे राज्य कोयला आयात करेंगे भी तो जब खदानों से मात्र 50 कि.मी. दूर स्थित संयंत्रों तक कोयला पहुँचाने के लिये रैक नहीं मिल पाती है तो बंदरगाह पर आने वाला कोयला 1000 कि.मी. से ज्यादा दूर स्थित विद्युत गृहों तक पहुँचाने के लिये रेलवे रैक कहाँ से आयेंगे। यानी लागत भी बढ़ जायेगी और कोयले के परिवहन के अभाव में विद्युत संकट भी बना रहेगा। विद्युत अभियंता संघ ने मुख्यमंन्त्री से अनुरोध किया है कि इस विषय पर केन्द्रीय विद्युत मंत्रालय, कोयला मंत्रालय एवं रेल मंत्रालय के समक्ष रखा जाये एवं दूसरी ओर राज्य विद्युत कंपनियों को यथावश्यक निर्देश दिये जायें ताकि ना तो राज्य की आम जनता पर आर्थिक बोझ पड़े और ना ही विद्युत संकट की स्थिति उत्पन्न हो।

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