जमीन की हेराफेरी, कलेक्टर कराएंगे जांच, मंत्री ने दिए आदेश

बिलासपुर। बहतराई में की गई जमीन की हेराफेरी का मामला राजस्व मंत्री जय सिंग अग्रवाल के संज्ञान में आ गया है। उन्होंने कलेक्टर को जांच कराने के लिए कहा है। इस मामले में तहसीलदार और पटवारी की भूमिका संदेह के दायरे में है। डेमोक्रेसी डॉट इन ने गुरुवार के अंक में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।

राजस्व विभाग के अधिकारी सरकारी जमीन को लेकर कैसे कैसे खेल खेल रहे है इसका ताजा तरीन उदाहरण बहतराई में सामने आया है। बहतराई ग्राम पंचायत की खसरा नंबर 310 जिसका रकबा 0.113 हेक्टेयर है। ये जमीन किसी समय एक किसान की थी अब इस जमीर पर PWD की सड़क बन चुकी है। इसका मुआवजा भी किसान को मिल चुका है। जमीन अधिग्रहण और मुआवजा वितरण की कार्रवाई अविभाजित मध्यप्रदेश के समय हुई थी। लेकिन तब के पटवारी ने रिकार्ड दुरुस्त नही किया। जिसके कारण जमीन अभी भी किसान के नाम पर चला आ रहा था। इसी का फायदा वर्तमान पटवारी अनिल डोडवानी ने उठाया और जमीन को उसने किसानों के वरिसानों के नाम पर चढ़ा दिया। यही नही पटवारी ने विक्रय करने के लिए नकल भी जारी कर दिया। जमीन को किसानों के वरिसानों ने बेच भी दिया। जमीन बिक्री के बाद सीमांकन के बहाने सड़क की जमीन को सड़क किनारे की सरकारी जमीन में फिट कर दिया। अब वह जमीन करोड़ो की हो गई। जमीन की इस हेराफेरी में एक करोड़ रुपए से ज्यादा का लेनदेन हो गया है। दूसरी ओर इस हेराफेरी में सरकार को ढाई करोड़ रुपए का चूना लग चुका है। एक तो सरकारी जमीन हाथ से गई ऊपर से ऊपर से पटवारी और जमीन दलाल एक झटके में लाल हो गए। खबर प्रकाशित होते ही इस हेराफेरी की जानकारी आला अधिकारियों को हो गई। शुक्रवार को जब राजस्व मंत्री शहर पहुंचे तो उन्हें इसकी जानकारी दी गई। उन्होंने तत्काल कलेक्टर को जांच कराने के लिए कहा और जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा है। माना जा रहा है कि इस मामले में पटवारी और तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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