सक्ती – जिले के हसौद तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत गुंजियाबोड इन दिनों अवैध राखड़ डंपिंग का गढ़ बनता जा रहा है। हैरत की बात यह है कि जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी इस गंभीर मामले पर आंख मूंदे बैठे हैं। सोन नदी के तट पर कंपनियों से निकलने वाली जहरीली राखड़ की खुलेआम डंपिंग हो रही है, फिर भी न तो तहसील प्रशासन हरकत में है और न ही प्रदूषण विभाग कोई ठोस कार्रवाई करता नजर आ रहा है।
अवैध राखड़ डंपिंग को लेकर लगातार दैनिक अखबारों में खबरें प्रकाशित हो रही हैं, बावजूद इसके प्रशासनिक तंत्र की निष्क्रियता कई सवाल खड़े कर रही है। आखिर ऐसी कौन-सी मजबूरी है कि अधिकारी कानून का पालन कराने में असफल साबित हो रहे हैं? या फिर कहीं न कहीं इस अवैध कारोबार को रसूखदार लोगों का संरक्षण प्राप्त है ? प्रदूषण नियंत्रण विभाग बिलासपुर के स्पष्ट दिशा-निर्देशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी सिर्फ कागजी कार्रवाई तक ही सीमित नजर आ रहे हैं। बरसात के मौसम में जब यही जहरीली राखड़ बहकर सोन नदी में मिलेगी, तब इसके दुष्परिणाम आमजन, पशुधन और पर्यावरण को भुगतने पड़ेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है, लेकिन प्रशासन की चुप्पी यह दर्शाती है कि मानो किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा हो। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी जनहानि के बाद ही जागेगा? या फिर जिम्मेदार अधिकारी अब भी अपनी कुर्सियों की नींद में डूबे रहेंगे? अब देखने वाली बात यह होगी कि खबरों और जनआक्रोश के दबाव में प्रशासन कब तक हाथ पर हाथ धरे बैठा रहता है और कब इस अवैध राखड़ डंपिंग पर प्रभावी कार्रवाई की जाती है।
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