25 लाख रुपए में लग जाता है प्राण वायु देने वाला ऑक्सीजन प्लांट, हर सौ बिस्तर हॉस्पिटल में ऑक्सीजन प्लांट लगाने की हो अनिवार्यता

नई दिल्ली। ऑक्सीजन (Oxygen) की भारी कमी के कारण देश में हाहाकार मच गया है। कई अस्पतालों ने कहा है कि उनके पास चंद घंटे की ही ऑक्सीजन बची हुई है। अगर सही समय पर उन्हें पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजनउपलब्ध नही कराई गई तो सैकड़ों मरीजों की जान जा सकती है। यही कारण है कि दिल्ली सहित कई राज्यों की सरकारें केंद सरकार पर ज्यादा से ज्यादा ऑक्सीजन सप्लाई को लेकर दबाव बना रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार से सभी अस्पतालों को पर्याप्त ऑक्सीजन की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए कहा है।

ऑक्सीजन को लेकर मचे इस हाहाकार के बीच एक सच्चाई यह है कि केवल 25 लाख रुपये की लागत से एक माध्यम स्तर का अस्पताल (50 से 100 बिस्तर वाले) अपनी पूरी जरूरतभर का ऑक्सीजन स्वयं पैदा कर सकता है। इसके लिए लगभग एक गैराज के जितनी जगह की जरूरत होती है। ऑक्सीजन का यह प्लांट लगाने के केवल एक हफ्ते से दस दिन के अंदर ऑक्सीजन का उत्पादन भी शुरू हो सकता है। यानी चंद दिनों में ऑक्सीजन गैस की किल्लत को हमेशा के लिए समाप्त किया जा सकता है। यही नहीं, अगर कोई बड़ा अस्पताल चाहे तो केवल 1.87 करोड़ रुपये की लागत से एक बड़े स्तर का ऑक्सीजन प्लांट लगा सकता है। इस प्लांट में रोजाना 600 ऑक्सीजन गैस सिलंडर (11.2 किलोग्राम क्षमता वाले) भर सकने लायक ऑक्सीजन का उत्पादन किया जा सकता है। इतनी भारी मात्रा में ऑक्सीजन की आवश्यकता बड़े-बड़े अस्पतालों तक को नहीं होती।

यानी दो करोड़ रुपये से भी कम की लागत में अस्पताल न सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी कर सकता है, बल्कि वह आसपास के दूसरे अन्य अस्पतालों की भी जरूरत पूरी कर सकता है। इसके लिए जगह भी बहुत ज्यादा नहीं चाहिए होती है। केवल 15X15 मीटर की जगह पर्याप्त होती है। इस तरह से उत्पादित ऑक्सीजन को मेडिकल के साथ-साथ औद्योगिक जरूरतों के लिए भी उपयोग किया जा सकता है। केवल 25 लाख रुपये के लगभग की शुरूआती कीमत से लेकर दो करोड़ रुपये तक में लगने वाले इन प्लांट्स को लगाने के लिए कई कंपनियां इस क्षेत्र में काम करती हैं। तकनीकी तौर पर भी इस तरह के प्लांट्स को लगाने की क्षमता हमारे पास है और यह कोई बड़ी चुनौती नहीं है। अगर कोई राज्य सरकार इस काम को प्रमुखता के साथ करना चाहे तो महीने भर के अंदर वह अपनी पूरी आवश्यकता की ऑक्सीजन पैदा कर सकती है। बड़ी बात यह है कि ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए पीएम केयर फंड से आर्थिक मदद भी मिल रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए आर्थिक मदद देने की घोषणा की है।

ऑक्सीजन कंसंट्रेटर
किसी मरीज को अगर सीमित मात्रा में ऑक्सीजन गैस की सप्लाई चाहिए होती है, तो उसके लिए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर बहुत उचित रहता है। यह फ्रिज के आकार की एक छोटी मशीन होती है जो बिजली से चलती है और वायु से शुद्ध ऑक्सीजन सोखकर मरीज तक पहुंचाती है। लगभग 60 हजार रुपये में आने वाला एक ऑक्सीजन गैस कंसंट्रेटर एक मरीज के लिए लगातार ऑक्सीजन उपलब्ध करा सकता है। हालांकि, इस समय ऑक्सीजन की कमी के कारण इसकी कीमतों में भी दो से तीन गुने तक का उछाल आ गया है। लेकिन जिन जगहों पर भारी फ्लो वाली ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है, वहां यह बहुत उपयोगी साबित नहीं होता है। हालांकि, बड़े ऑक्सीजन कंसंट्रेटर भी आते हैं जो ज्यादा मात्रा में ऑक्सीजन उपलब्ध करा सकते हैं, लेकिन इनकी कीमत काफी अधिक होती है।
सोचा ही नहीं था ये खतरा
दरअसल, ऑक्सीजन गैस की मची अफरा-तफरी के पीछे ऑक्सीजन गैस की उपलब्धता की कमी नहीं है। बल्कि इसकी असली वजह यह है कि हमारी सरकारें हों या हमारे अस्पताल इस परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार ही नहीं थे। अगर ऑक्सीजन जैसी बेहद आवश्यक चीज के लिए हमारी सरकारों ने बड़े अस्पतालों के ऊपर उत्पादन करने संबंधी नियम लागू किया होता तो आज यह स्थिति पैदा ही नहीं होती।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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