केयर एंड क्योर : 12 घंटे के अंदर 8 कोविड पेशेंट की मौत, हॉस्पिटल में न केयर है न क्योर ? जाने मरीज के परिजनों ने क्यों किया हंगामा…

बिलासपुर। शहर के प्रताप चौक स्थित केयर एंड क्योर हॉस्पिटल नाम बड़े और दर्शन छोटे वाली कहावत को चरितार्थ कर रहा है। यहां भर्ती होने वाले मरीजों से इलाज के नाम पर लाखों रुपए लिए जा रहे के लेकिन मरीजो को जीवन मिलने के बजाय मौत मिल रही है। पिछले 12 घण्टे के अंदर यहां 8 कोविड पेशेंट की मौत हो चुकी है। न तो यहॉ मरीजों का केयर हो रहा है और न क्योर हो रहा है।

प्रदेश एक तरफ कोरोना का तांडव कम होने का नाम नही ले रहा है तो दूसरी और बड़े बड़े हॉस्पिटल बना रखे डॉक्टरों ने इस आपदा को अवसर के रूप में बदल लिया है। पैसा बनाने के चक्कर मे धरती के ये भगवान लोगों की जान से खिलवाड़ करने से बाज नही आ रहे है। ताजा मामला बिलासपुर के प्रताप चौक में स्तिथ निजी अस्पताल केयर एंड क्योर में आया है जहाँ पिछले 24 घण्टो में अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही के कारण 8 लोगो की मौत हो गई है। जीवन भर की गाढ़ी कमाई कर अपनो को बचाने की आश में परिजन अपनों की मौत की खबर सुनते ही उबल पड़ते है। आज उस समय एक मरीज के परिजन आग बबूला हो गए जब इलाज के पैसे खत्म हो जाने के पर वो मरीज दूसरे अस्पतालों में इलाज कराने की बात की। पहले तो परिजन सेवक्ज गया की थोड़ी देर में डिस्चार्ज कर देंगे लेकिन कुछ देर बाद ही अस्पताल प्रबंधन ने मरीजों को मृत घोषित कर दिया। इतना सुनते ही परिजनों ने जमकर हंगामा किया। कुछ देर बाद जब मीडिया के लोग पहुंचे तो उन्हें अंदर जाने की अनुमति भी नही दी। अपनी नाकामी छुपाने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने गेट में बकायदा गेटकीपर को समझाइश देकर रखी थी ताकि अस्पताल की करतूत बाहर ना जा सके और मौत का खेल अस्पताल द्वारा यूं ही खेला जा सके। हंगामा को देखते हुए यहां पर पुलिस भी आई और तहसीलदार भी आए लेकिन हालचाल पूछकर वापस लौट गए।

00 नोडल अधिकारी ने दी थी चेतावनी इस अस्पताल में कैसा इलाज हो रहा है इसका उदाहरण बुधवार को मिल गया जब दोपहर 1 बजे तक यहां 8 लोगो के मरने की खबर आई। यानि इलाज के लिए नही बल्कि मौत की संख्या में रिकार्ड कायम करने के लिए यह अस्पताल अब चर्चित हो रहा। और हॉस्पिटल की फीस इतनी कि अपोलो और एस्कॉर्ट जैसे हॉस्पिटल प्रबंधन को शर्म आ जाए। इलाज में लापरवाही और मरीजो से मनमाना फीस वसूली की लगातार शिकायत मिल रही थी। यही कारण है कि कलेक्टर द्वारा नियुक्त नोडल अधिकारी वरुण सिंग राजपूत ने अस्पताल प्रबंधन को जमकर धमकाया था और सख्त करवाई की चेतावनी दी थी।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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