चंदन तस्करों को नहीं पकड़ पाई रतनपुर पुलिस की पूरी टीम, 5 लाख की लकड़ी छोड़कर भागे तस्कर

बिलासपुर। रतनपुर पुलिस की बड़ी नाकामी सामने आई है। बस स्टैंड में चंदन की लकड़ी के तस्करों को पकड़ने गई पुलिस को देखते ही तस्कर भाग खड़े हुए और पुलिस की पूरी टीम मुंह ताकती रह गई। आरोपियों के भागने के बाद पुलिस सौ किलो लकड़ी समेटकर थाने आ गई। जब्त लकड़ी की कीमत 5 लाख रुपए बताई जा रही है।

मामले का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार से है, कि दिनांक 9 फरवरी को रतनपुर पुलिस द्वारा ‘पुष्पा’ फिल्म की तर्ज पर हो रही चंदन की लकड़ियों की तस्करी पर कार्यवाही की है। बिलासपुर जिले के सीमावर्ती जिले गौरेला/पेन्ड्रा/ मरवाही तथा कोरिया जिले में सफेद चंदन के पेड़ो की उपज होती है। आज SSP पारूल माथुर को मुखबिर से सफेद चंदन की लकड़ी की तस्करी के संबंध में सूचना मिली थी, की दो युवक नया बस स्टैण्ड रतनपुर में बोरियों में भरकर सफेद चंदन की लकड़ी लेकर उत्तर प्रदेश जाने के लिए वाहन का इंतजार कर रहे है। पुलिस अधीक्षक के मुखबिर की सूचना पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण रोहित झा, एस0डी0ओ0पी0 कोटा आशिष अरोरा के दिशानिर्देश पर थाना प्रभारी रतनपुर हरविंदर सिंह के नेतृत्व में सहायक उप निरीक्षक हेमंत सिंह, आरक्षक – रामलाल सोनवानी, सचिन तिवारी के टीम गठित कर रेड कार्यवाही की गई। बस स्टैण्ड रतनपुर में बोरी लेकर खड़े दो अज्ञात युवक पुलिस की वाहन
को देखकर भागने लगे जिनका पीछा किया गया, किन्तु संदेही युवक अंधेरे का लाभ उठाकर भाग गये। रतनपुर पुलिस द्वारा मौके पर पहुंचकर संदिग्ध युवकों द्वारा छोड़े गये बोरे को चेक किया तो उसमें 2-2 फीट
लम्बाई के कुल 15 नग सफेद चंदन के कटे हुए खुशबूदार टुकड़े बरामद किया गया। लकड़ी का तौल कराने पर 100.11 किलोग्राम आया। जप्त सफेद चंदन की लकड़ियो की कीमत लगभग 05 लाख रूपये बताई जा रही है। रतनपुर पुलिस द्वारा सफेद चंदन की खुशबुदार लकड़ियो को संदिग्ध चोरी का तथा शासन द्वारा प्रतिबंधित लकड़ी के तस्करी के अपराध से संबंधित मसरूका होने के संदेह पर धारा- 102 जा.फौ. अंतर्गत कार्यवाही की जा रही
है।
सफेद चंदन की लकड़ी की कटाई एवं परिवहन भारतीय वन अधिनियम अंतर्गत प्रतिबंधित एवं दण्डनीय है। सफेद चंदन का उपयोग औषधि सौन्दर्य प्रसाधन एवं धार्मिक कार्यों में किया जाता है। छत्तीसगढ़ में चंदन दुर्लभ है। पुलिस को ऐसा अनुमान है कि अज्ञात लोगों द्वारा चोरी कर चंदन की लकड़ी को उत्तरप्रदेश की ओर ले जाया जाता है।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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