बिलासपुर। वन मंडल द्वारा शनिवार को कोपरा जलाशय में वाटर बर्ड का सेंसस कराया गया। तीन घण्टे तक चली गणना के बाद विभाग ने जलाशय में 115 प्रजातियों की जलीय पक्षी होने का दावा किया है जो पूरी तरह से फर्जी है। वन विभाग के अधिकारी ऊपर के अधिकारियों और मंन्त्री को खुश करने के चक्कर मे संख्या डबल करके बताया गया है।

बिलासपुर का DFO कार्यालय हमेशा से फर्जी काम करने के लिए चर्चित रहा है। अब विभाग ने कोपरा जलाशय में जलीय पक्षियों की गणना करने के बाद अप्रत्याशित संख्या बताकर अपना किरकिरी कर लिया है। डर असल वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री मोहम्मद अकबर के निर्देशानुसार प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी एवं सदस्य सचिव अरुण पांडेय के मार्गदर्शन में 12 फरवरी को वन विभाग बिलासपुर द्वारा कोपरा जलाशय में एक दिवसीय एशियन वाटर बर्ड सेंसस का आयोजन किया गया। पक्षियों की गणना सुबह 7 बजे से 10 बजे तक चला, जिसमें रेड क्रिस्टेड पोचार्ड, किंगफिशर की 2 प्रजातियां, कॉरमोरेंट, लिटिल ग्रीब, फेरुजीनियास बदख जैसी 115 वाटर बर्ड्स की प्रजातियां देखने का दावा वन विभाग ने किया है। पक्षियों की इस अप्रत्याशित संख्या को देखते हुए पक्षी प्रेमियों के कान खड़े हो गए है। उनका कहना है अभी कोपरा जलाशय में 50 से ज्यादा प्रजातियों के पक्षी नहीं है, गणना करने वालों ने 3 घंटे के अंदर कहां से इतनी प्रजातियों की पक्षी देख लिए समझ से परे है। जानकारों की माने तो पिछले दो-साल में यहां पर 180 प्रजातियों के पक्षी देखे गए है। लेकिन वो अलग-अलग मौसम और अलग-अलग समय मे लिए गए है। क्योंकि यहां आने वाली पक्षियों में कुछ स्थानीय पक्षी है जो हमेशा देखे जाते है। बाईपास माइग्रेटरी बर्ड है जो यात्रा के दौरान कुछ दिन के लिए अपना पड़ाव डालते है और चल देते है। कुछ माइग्रेटरी बर्ड होते है जो ठंड में विदेशों से आते है और गर्मी शुरू होते ही चले जाते है। अभी जलाशय में 50 से अधिक प्रजातियों के जलीय पक्षी नही है।
00 गणना के दौरान ये अधिकारी थे मौजूद
एशियन वाटर बर्ड गणना कार्यक्रम राष्ट्रीय स्तर पर पूरे देश में आयोजित किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में अरुण भरोस के मार्गदर्शन में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बिलासपुर वन विभाग से वन मंडलाधिकारी कुमार निशांत, अचानकमार अमरकंटक बायोस्फियर रिजर्व के वन मंडलाधिकारी विष्णु नायर मुख्य रूप से उपस्थित थे। साथ ही गुरु घासीदास विश्वविद्यालय से शोधार्थी प्रतिभागी फरगस मार्क एंथोनी, आलोक चन्द्राकर, आकृति ताम्रकर, डॉ. हिमांशु गुप्ता ने भी अपना विशेष योगदान दिया तथा यश निर्मलकर, अभिजीत शर्मा आदि प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया।
00 मैं 9 बजे वापस आ गया था
पक्षियों के गणना में शामिल डॉ हिमांशु गुप्ता का कहना है कि मुझे शुक्रवार रात को अचानक बताया गया कि आपको टीम में शामिल किया गया था। फिर भी सुबह 7 बजे पंहुच गया था और 9 बजे तक रहा। मुझे ड्यूटी पर जाना था इसलिए लौट आया था। मैंने 24 पक्षियों की गणना की थी। मेरे आने के बाद क्या हुआ मैं नहीं जानता।
00 आंकड़ा पूरी तरह से फर्जी है
इस मामले में वाइल्ड लाइफ फोटो ग्राफर और पक्षी विशेषज्ञ शिरीष डामरे का कहना है कि वन विभाग का आंकड़ा पूरी तरह से फर्जी है। मेरा दावा है कि इतनी प्रजातियों के जलीय पक्षी अभी जलाशय में नहीं है।
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