ITI में ट्रेनिंग ऑफिसर की भर्ती, आरक्षण नियमों का पालन नहीं होने पर मिले शासन की नोटिस पर हाईकोर्ट की रोक

बिलासपुर। नियुक्ति के 9 साल बाद ट्रेनिंग ऑफिसरों को सेवा से हटाने संबंधि शासन की नोटिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। नोटिस में कहा गया था कि ITI में की गई भर्ती में आरक्षण नियमों का पालन नहीं किया गया है। इसलिए क्यों न उन्हें सेवा से हटा दिया जाय ?

आईटीआई में ट्रेनिंग ऑफिसर की भर्ती में आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं होने की बात कहते हुए जारी नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। इस पर अंतिम सुनवाई 21 फरवरी को होगी। विभाग ने सभी को सेवा से हटाने के लिए नोटिस जारी किया था, जिस पर हाईकोर्ट ने पूर्व की सुनवाई में रोक लगा दिया है।
आशीष कुमार चंद्राकर, ममता बंजारे, निशा वर्मा नायक सहित अन्य ने अपने वकील उत्तम पांडेय, फैजल अख्तर, मलय श्रीवास्तव के माध्यम से 32 याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर की हैं। इसमें उन्होंने बताया है कि 2010 में आईटीआई में ट्रेनिंग ऑफिसर, ड्राफटमेन, ट्रेसर आदि के 723 पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी हुआ था। इसमें से 640 की नियुक्ति 2013 में आरक्षण रोस्टर का पालन करते हुए किया गया था। नियुक्ति के दौरान लाइट ड्राइविंग लाइसेंस मांगा गया। इसे चुनौती देने पर कोर्ट ने गलत आदेश पाया और रोक लगा दिया था। इसके बाद कमलेश कुमार साहू ने चयन समिति में शामिल अधिकारियों के खिलाफ गड़बड़ी किए जाने का आरोप लगाते हुए शिकायत की। इस पर विभागीय जांच शुरू हो गई, विभागीय जांच का कागज किसी को नहीं मिला। 2021 में विभाग के तरफ से नोटिस जारी किया गया कि रिजर्वेशन रोस्टर का पालन नहीं हुआ है, क्यों न सेवा से हटा दिया जाए। नियुक्ति 2013 में हुई प्रशिक्षण अवधि के साथ ही एनएससी का टाइम भी पार हो गया और कर्मचारी नियमित हो गए हैं। नियुक्ति के 9 साल बाद जारी नोटिस को चुनौती दिए जाने पर नोटिस की कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। अब मामले में अंतिम सुनवाई होनी है।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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