रिश्वत लेते हुए डिप्टी कलेक्टर और फॉरेस्टर गिरफ्तार, फॉरेस्टर ने 50 हजार रुपए तो डिप्टी कलेक्टर ने 20 हजार रुपए मांगे थे रिश्वत में

बिलासपुर। एन्टी करप्शन ब्यूरो की टीम ने एक डिप्टी कलेक्टर और एक फॉरेस्टर को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया है। फॉरेस्टर लाइसेंस नवीनीकरण के लिए तो डिप्टी कलेक्टर ने बोर उत्खनन के लिए स्वीकृत राशि जारी करने के लिए रिश्वत की मांग की थी।
मिली जानकारी के अनुसार एसीबी और ईओडब्ल्यू की टीम ने घूसखोरी के मामले में शिकायत के बाद गरियाबंद और बिलासपुर में दो बड़ी कार्रवाई की है। शिकायत में बताया गया कि ग्राम पंचायत में बोर उत्खनन के लिए शासन की ओर से ₹600000 स्वीकृत किया है। राशि के लिए जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी गरियाबंद से संपर्क किया। डिप्टी कलेक्टर जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी करुण डहरिया से राशि जारी करने के लिए 20000 रिश्वत की मांग की। एसीबी के अनुसार शिकायत को गंभीरता से लिया गय और आरोपी करुण डहरिया को हाथ पकड़ने के लिए पीड़ित को ₹20000 देकर भेजा गया। इसके बाद एसीबी की टीम ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी के कार्यालय में धावा बोल दिया। मौके से ₹20000 को नगद बरामद किया गया। जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी करुण डहरिया के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा 7 का के तहत अपराध दर्ज किया गया है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय के सामने पेश किया गया। एक अन्य कार्रवाई में एसीबी की टीम ने बिलासपुर में सीसीएफ कार्यालय के उड़नदस्ता कर्मचारी गजेंद्र गौतम को घूस लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पीड़ित ने अपनी शिकायत में बताया था कि फॉरेस्टर गजेंद्र गौतम दुकान लाइसेंस नवीनीकरण के लिए ₹50000 की मांग किया है। लाइसेंस नवीनीकरण के लिए उसने अब तक 35800 की पहली किस्त का भुगतान कर दिया है। दूसरी किस्त की लगातार मांग कर रहा है। बातचीत का ऑडियो भी सुनाया। पीड़ित की शिकायत सही पाए जाने पर एसीबी की टीम ने गजेंद्र को भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा 7 का के तहत गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद फॉरेस्टर को न्यायालय के सामने पेश किया गया है।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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