CECL ने जमीन तो ली, पर न मुआवजा दिया न नौकरी, भू-विस्थापित ने खाया जहर, हुई मौत

कोरबा। एसईसीएल की कुसमुंडा परियोजना से प्रभावित एक ग्रामीण ने प्रबंधन से त्रस्त होकर अपनी जान दे दी है। ग्राम चंद्रनगर निवासी दिलहरण पटेल की मौत हो गई है। पीछले दिनों मुआवजा, नौकरी और विस्थापन का पैसा नही मिलने से जहर खा लिया था। उपचार के दौरान शुक्रवार की रात मौत हो गई।
जमीन के बदले नौकरी, मुआवजा और बसाहट मिलने में हो रही लेटलतीफी से SECL के भू-विस्थापित काफी परेशान हो रहे है। यही वजह है कि हताशा में भू विस्थापित आत्म हत्या करने पर उतारू हो रहे है। पीछले दिनों नौकरी, मुआवजा और बसाहट की व्यवस्था नहीं होने के कारण दिलहरण पटेल ने जहर खा लिया था और उसको गंभीर हालत में इलाज के लिए कोरबा के मेडिकल कालेज भर्ती कराया गया था। बताया जा रहा है की दिलहरन नौकरी, मुआवजा और बसाहट के लिए कई महीने से चक्कर काट रहा था। लेकिन SECL प्रबंधन उसकी सुन नही रहा था। वह SECL मुख्यालय का चक्कर काट-काटके हताश हो चुका था।
पिता की मौत के बाद दिलहरण के पुत्र मुकेश कुमार पटेल ने बताया कि एसईसीएल ने घर का सर्वे किया था और कहा था कि काम देंगे। इसके बाद न तो काम मिला और न ही मुआवजा दिया गया। एसईसीएल के इस रवैय्ये के कारण जीवन यापन मुश्किल हो गया था। इन मुश्किल हालातों में परेशान होकर दिलहरण ने जहर का सेवन कर लिया था। दिलहरण के द्वारा उठाए गए आत्मघाती कदम और मौत के बाद अब यह सवाल जरूर उत्पन्न हुआ है कि आखिर क्या उसकी मौत के लिए जिम्मेदार प्रबंधन के अधिकारी अथवा कर्मचारी के विरुद्ध पुलिस में एफआइआर दर्ज कराई जाएगी। जिनके कारण हताशा में आकर उसने यह कदम उठाया क्या ऐसे गैर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी ? जो मौत के लिए कहीं न कहीं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर जिम्मेदार हैं ? और उसे आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर दिया।
आखिर उसको जमीन के एवज में कोई भी काम और मुआवजा राशि देने में विलंब क्यों किया गया ? मुआवजा का प्रकरण किस वजह से लंबित रखा जाता है ? क्यों नहीं भूमि अर्जन के तत्काल बाद मुआवजा के प्रकरण निपटाए जाते हैं ?

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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