दुर्ग। ईडी अफसर बनकर 2 करोड़ रुपए की ठगी दर्जनभर अधिक लोगों को पुलिस ने मुंबई से गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों में 1 महिला भी हैं। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है। आरोपियों से पुलिस ने करीब 1 करोड़ 25 लाख रुपए नकद समेत स्कार्पियो वाहन जब्त किया गया है।
बताया जा रहा है की आरोपियों ने लूट और ठगी को अंजाम देने के लिए जबरदस्त प्लान बना रखा था। इस प्लान के अनुसार मुख्य आरोपी दो सप्ताह पहले ही किसी महाराष्ट्र और छतीसगढ़ के लोकल एजेंट गजानंद वैरागड़े के माध्यम से गिरीश वालेचा के सम्पर्क में आया था। जिसके बाद 27 जून को डील के तहत दो करोड़ रुपये दिया जाना था। गिरीश वालेचा और एजेंट गजानंद दोनों पैसे लेने ऑफिस पहुंचे थे। पैसा सामने था तभी पांच लोग ED का अधिकारी बनकर पहुंचे और लूट की घटना को अंजाम देकर स्कॉर्पियों से फरार हो गए। आरोपियों ने पैसे को रास्ते में बांट लिया था। इसी बीच प्लान लीक हो गया।
पुलिस ने आरोपियों के पास से एक करोड़ 26 लाख 16 हजार रुपए नकद। दो लाख के सोने के चैन अंगूठी, स्कार्पियों एवं अर्टिगा वाहन, 10 नग एंड्रॉयड मोबाइल, ईडी और सीबीआई के फर्जी पदनाम का पहचान पत्र, फर्जी मीडिया की आईडी और आधिकारी की गाड़ी की पीली बत्ती, बैंक के पास बुक, फर्जी आधार और पैन कार्ड, सभी बरामद किए गए हैं।
गौरतलब है की दुर्ग के चावल कारोबारी अखिलेश गुप्ता का मोहननगर के पारख काम्प्लेक्स में ऑफिस है। सप्ताहभर पहले मंगलवार को दोपहर करीब 12 बजे स्कॉर्पियो में सूट-बूट धारी पांच युवक धड़धड़ाते हुए गुप्ता के ऑफिस में घुसे। ठगों ने उन्हें बताया कि वे ईडी के अधिकारी हैं और दिल्ली से आए हैं। उन्हें अवैध रकम होने की जानकारी मिली है। इसके बाद दफ्तर की तलाशी शुरू कर दी। इस दौरान उनके हाथ एक बैग लगा, जिसमें दो करोड़ रुपए थे। बैग हाथ में आते ही ठगों ने कारोबारी को हिरासत में ले लिया और अपनी गाड़ी में बैठाकर राजनांदगांव की ओर निकले। इस बीच कारोबारी यह गुहार लगाते रहे कि यह रकम उनकी अपनी नहीं, बल्कि कई व्यापारियों की है, जिसे पेमेंट के लिए उन्होंने रखा था। ठगों ने कारोबारी को सोमनी टोल प्लाजा के पास उतार दिया।
ईडी के चंगुल से बचने के भ्रम में पहले तो कारोबारी ने राहत की सांस ली, लेकिन जब घटनाक्रम के संबंध में अपने करीबियों से जिक्र किया, तब ठगी का अहसास हुआ और पुलिस में रिपोर्ट लिखाई। एसपी शलभ सिन्हा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच शुरू करने के निर्देश दिए। प्रारंभिक जांच में ठगों के महाराष्ट्र की ओर जाने की बात सामने आई। इसके आधार पर क्राइम ब्रांच की टीम को मुंबई के लिए रवाना किया गया था।
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