निगम ने कहा जो तीमंजला बिल्डिंग गिरी वो अवैध, तो सालों पहले बने अवैध निर्माण पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई ? अवैध निर्माण के लिए जिम्मेदार कौन ?

बिलासपुर। नगर निगम ने मंगला चौक में गिरी तीमंजला इमारत को अवैध बताया है। निगम का कहना है कि दुकान संचालक को केवल दो फ्लोर बनाने की अनुमति थी लेकिन उसने तीन मंजिल बना लिया। इसके अलावा अतिरिक्त जमीन पर भी निर्माण करा लिए। अब सवाल ये उठ रहा है क्या बिल्डिंग गिरने के बाद निगम को पता चला कि निर्माण अवैध है ? यदि पहले से पता था तो सालों से इस अवैध निर्माण पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई ? क्या निगम के अधिकारी ऐसे जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई करेगी जिनपर अवैध निर्माण रोकने की जिम्मेदारी थी ?
मंगला चौक मे शनिवार को सुबह एक तीन मंजिला इमारत गिर गई थी। घटना की जानकारी मिलते ही निगम कमिश्नर समेत नगर निगम की टीम तत्काल मौके पर पहुंच कर राहत कार्य में जुट गए थे। नगर निगम के अधिकृत प्रेस रिलीज में खा गया है जो इमारत धाराशायी हुई है उसे अवैध तरीके से आगे बढ़ाते हुए नाले के ऊपर बनाया गया था। नाली की दीवार के सहारे टिकें निर्माण पर तीनों मंजिल का पूरा भार दे दिया गया था। कमजोर नींव पर अधिक भार इस हादसे की एक प्रमुख वजह है। मंगला चौक स्थित श्री राम मेडिकल स्टोर नाम से संचालित दुकान जिसकी भू स्वामी नीलम गुप्ता है, उनके द्वारा निगम से ग्राउंड समेत दो फ्लोर के निर्माण की अनुमति ली गई थी। जिसमें तकनीकी नियम के मुताबिक नाला से एक तरफ 6 फीट और दूसरी तरफ 5 फीट 3 इंच की दूरी पर निर्माण किया जाना था। लेकिन भवन मालिक ने अवैध तरीके से अतिक्रमण करते हुए दोनो तरफ को अपने कब्जे में लेकर नाला के ऊपर ही निर्माण करा लिया गया। जिसके ऊपर पूरी बिल्डिंग का भार था। बाद में भवन मालिक द्वारा बिना अनुमति, नक्शा पास कराए तीसरे फ्लोर का भी निर्माण करा लिया गया। तीनों मंजिल का भार सामने की तरफ बिना नाली के दीवार पर था। वर्तमान में निगम द्वारा मंगला चौक में कल्वर्ट और नाला निर्माण किया जा रहा है। जिसमें निर्माण के दौरान नाली की दीवार यथावत है। यदि नगर निगम की बात सही है तो अवैध निर्माण हुआ कैसे ? क्या निगम अधिकारियों को इस बात की जानकारी थी ? यदि थी तो इतने सालों से उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई ? इसके अलावा नगर निगम को यह भी बताना चाहिए कि शहर में ऐसी कितनी दुकानें और मकान अवैध है ? कही ऐसा तो नहीं की फिर कहीं कोई हादसा हो जाए और उसके बाद निगम उसे अवैध बताकर अपना पल्ला झाड़ ले।

पांच सदस्यीय टीम गठित
इस पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए निगम कमिश्नर श्री कुणाल दुदावत ने अपर आयुक्त श्री राकेश जायसवाल की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय टीम का गठन किया है। जो पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट देंगे। जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जर्जर भवनों के सर्वे के निर्देश
निगम कमिश्नर ने शहर के सभी जर्जर और जनहानि के मद्देनजर खतरा बन चुकें भवनों का सर्वे कर चिन्हांकन करने के निर्देश दिए है। तीन दिनों के भीतर ऐसे सभी भवनों के चिन्हांकन के निर्देश दिए गए है।

मानवीय आधार ठेकेदार संघ ने दी सहायता राशि
भवन के धाराशायी होने जाने पर हानि को देखते हुए नगर निगम के ठेकेदार संघ द्वारा दुकान मालिक को 10 लाख रूपये की सहायता राशि दी है। प्रारंभिक तौर पर जो जानकारी मिली है की उक्त भवन में एक फ्लोर बिना नक्शे के निर्माण किया गया है,साथ ही सेट वेट के लिए दोनों तरफ 6 फीट का स्थान छोड़ना था,जिसे नहीं छोड़ा गया।इसके अलावा निर्माण को आगे बढ़ाते हुए नाली के ऊपर अवैध निर्माण भी किया गया था। मामले की जांच के लिए अपर आयुक्त की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया है। जिसके रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कुणाल दुदावत,निगम कमिश्नर

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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