रायपुर। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लगातार तीसरी बार किसानों के लिए तिजोरी खोल है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना के लिए मुख्यमंत्री ने 5 हजार 703 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इसके अलावा 14 विकास खंडों में चिराग योजना चलेगी, इसके लिए डेढ़ सौ करोड़ रुपए का प्रावधान किया है।

किसानों को न्याय
1. राजीव गांधी किसान न्याय योजना हेतु 5 हजार 703 करोड़ का प्रावधान।
2. बस्तर संभाग के 7 आदिवासी बहुल जिले एवं मुंगेली जिले के चयनित 14 विकास खण्डों में पोषण सुरक्षा तथा किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हेतु चिराग योजना के लिए 150 करोड़ का प्रावधान।
3. कृषक जीवन ज्योति योजना अंतर्गत कृषि पम्पों को निःशुल्क विद्युत प्रदाय हेतु 2 हजार 500 करोड़ का प्रावधान। लगभग साढ़े 5 लाख किसान लाभान्वित।
4. कृषि पम्पों के ऊर्जीकरण के लिये 150 करोड़ का प्रावधान।
5. सौर सुजला योजना अंतर्गत सरकार के गठन के पश्चात अब तक 31 हजार 712 सोलर पंपों की स्थापना। इस बजट में 530 करोड़ का प्रावधान।
6. किसानों को शून्य ब्याज दर पर 5 हजार 900 करोड़ का अल्पकालीन कृषि ऋण वितरित करने का लक्ष्य। ब्याज अनुदान के भुगतान हेतु 275 करोड़ का प्रावधान।
7. इस वर्ष 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बहुवर्षीय फलोद्यान, 4 हजार 500 हेक्टेयर में सब्जी उत्पादन तथा 13 सौ हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती हेतु अनुदान देने का लक्ष्य रखा गया है। उद्यानिकी फसलोंके लिए बजट में 495 करोड़ के प्रावधान।
पशुपालकों को न्याय
1. गोठानों को रोजगारोन्मुखी बनाने के लिए गोधन न्याय योजना प्रारंभ की गई है। गोठान समितियों द्वारा पशुपालकों से 2 रू. किलो की दर से गोबर क्रय हेतु 80 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है।
2. स्व सहायता समूहों द्वारा अब तक गोबर से 71 हजार 300 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट तैयार किया जा चुका है।
3. वर्तमान में 7 हजार 841 स्व-सहायता समूहों के लगभग 60 हजार सदस्यों को वर्मी खाद उत्पादन, सामुदायिक बाड़ी, गोबर दिया निर्माण इत्यादि से 942 लाख की आय हो चुकी है।
4. गोठान योजना के लिये बजट में 175 करोड़ का प्रावधान।
मछुआरों को न्याय
1. मत्स्य पालन को बढ़ावा देने हेतु इसे कृषि के समान दर्जा दिया जायेगा। बजट में मत्स्य पालन की गतिविधियों के लिये 171 करोड़ 20 लाख का प्रावधान।
2. मत्स्य पालन के क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं को देखते हुए स्वयं की भूमि पर तालाब निर्माण कर मत्स्य पालन की योजना हेतु 28 करोड़ का प्रावधान ।
3. मत्स्य पालन हेतु उपलब्ध जल क्षेत्रों में से 95 प्रतिशत क्षेत्र को विकसित करके 2 लाख से अधिक मछुआरों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।
परम्परागत कर्मकारों को न्याय
1. पराम्परागत ग्रामीण व्यवसायिक कौशलों के पुनरूद्धार एवं कर्मकारों को सहयोग प्रदान करने के लिए तेलघानी विकास बोर्ड, चर्म शिल्पकार विकास बोर्ड, लौह शिल्पकार विकास बोर्ड एवं रजककार विकास बोर्ड की स्थापना की जायेगी।
2. कोसा उत्पादन एवं वस्त्र निर्माण के कार्यों में 50 हजार से अधिक हितग्राहियों को रोजगार से जोड़ा गया है। हाथकरघा वस्त्र बुनाई के माध्यम से 60 हजार परिवारों को रोजगार मिला है।
3. लाख पालन के क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं को देखते हुए ब्याज रहित ऋण की सुविधा हेतु लाख पालन को भी कृषि के समकक्ष दर्जा दिया गया है।
श्रमिकों को सहायता
1. असंगठित श्रमिक सुरक्षा एवं कल्याण मण्डल अंतर्गत पंजीकृत श्रमिक से संबंधित आंकड़ों के ऑनलाईन संधारण तथा विभिन्न योजनाओं का त्वरित लाभ पहुंचाने की दृष्टि से विभिन्न एप निर्माण एवं राज्य स्तरीय हेल्प डेस्क सेन्टर की स्थापना की जायेगी।
2. असंगठित श्रमिकों, ठेका मजदूरों, सफाई कामगार एवं घरेलू कामकाजी महिलाओं के कल्याण की योजना में 61 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
3. राज्य बीमा अस्पताल योजना में 56 करोड़ तथा कर्मचारी राज्य बीमा चिकित्सालयों हेतु 48 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।
4. ग्रामीण कृषि भूमिहीन श्रमिकों को सहायता हेतु नवीन न्याय योजना प्रारंभ की जायेगी।
वन आश्रितों को सहायता
1. 24 हजार 827 नये वन अधिकार पत्रों सहित अब तक 4 लाख 36 हजार 619 व्यक्तिगत वन अधिकार पत्रों का वितरण किया गया है।
2. वन अधिकार पत्र धारी वनवासियों को भी किसानों के समान अधिकार देते हुए इस वर्ष किसान न्याय योजना का लाभ दिया गया है।
3. राज्य सरकार द्वारा विशेष पहल करते हुए पहली बार 2 हजार 175 सामुदायिक वन संधारण अधिकार ग्राम सभाओं को दिये गये हैं। सामुदायिक वन अधिकार पत्र के रूप में वितरित वन भूमि पर फलदार वृक्षों के रोपण को प्रोत्साहित किया जायेगा।
4. चालू सीजन के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 112 करोड़ की लागत के 4 लाख 74 हजार क्विंटल 52 प्रकार के लघु वनोपज का संग्रहण किया गया है। ट्राईफेड नई दिल्ली द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर लघु वनोपज क्रय करने वाले राज्यों में छत्तीसगढ़ का प्रथम स्थान है।
5. राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में कोदो, कुटकी एवं रागी को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अन्य लघु वनोपज की भांति उपार्जित किया जाएगा।
6. 12 लाख 50 हजार तेंदू पत्ता संग्राहक परिवारों को आकस्मिक मृत्यु अथवा दुर्घटना की स्थिति में सुरक्षा प्रदान करने के लिए ”शहीद महेंद्र कर्मा तेंदू पत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजना’’ प्रारंभ की गई है। इस हेतु 13 करोड़ का प्रावधान है।
7. स्थानीय विकास कार्यक्रमों हेतु 359 करोड़ तथा आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विकास हेतु 170 करोड़ का प्रावधान है।
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