80 कर्मचारियों को गुपचुप तरीके से किया नियमित, आदिवासी विकास विभाग में बड़ा खेल, यहां भी अधिकारी और बाबू की भूमिका संदिग्ध

बिलासपुर। आदिवासी विकास विकास विभाग में 80 कर्मचारियों को गुपचुप तरीके नियमित कर दिया गया है। यहां भी विभागीय अधिकारी के अलावा एक बाबू की भूमिका संदिग्ध है। विभागीय सूत्रों का कहना है की किसी भी कर्मचारी को फ्री में नियमित नही किया गया है।
शिक्षा विभाग में प्रमोशन और ट्रांसफर घोटाले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। आदिवासी विकास विभाग में भी नियमितीकरण का बड़ा खेल सामने आ गया है। विभाग में 80 ऐसे कर्मचारियों को गुपचुप तरीके से नियमित कर दिया गया है जो दैनिक वेतन भोगी के रूप में काम कर रहे थे। इनमे ऐसे कर्मचारी भी शामिल है जिन्हे मौखिक आदेश पर काम पर रखा गया था। इन्हे कलेक्टर दर वेतन दिया जा रहा था। आदिवासी विकास विभाग में हुए इस खेले भी अधिकारी के अलावा एक बाबू की भूमिका बताई जा रही है। विभागीय सूत्रों की माने तो जिन 80 कर्मचारियों को नियमित किया गया है उन्हे मानवीय आधार पर फ्री में नियमित नई किया गया है। लाखों रुपए की उगाही की गई है। मतलब साफ है कि विभागीय अधिकारी और बाबू मिलकर लाखों रुपए का धंधा घर बैठे कर लिए है। विभागीय कर्मचारियों के बीच इस नियमितीकरण को लेकर जबरदस्त खुसुर-फुसुर हो रही है। लेकिन शिक्षा विभाग की तरह बवंडर ना खड़ा हो जाए करके सब खामोश है। लेकिन इतना स्पष्ट है की विभाग ने नियम कानून को ताक पर रखकर 80 लोगो को नियमित किया गया है। बुधवार को भी विभागीय मंत्री मोहन मरकाम की समीक्षा बैठक के पहले विभाग के अधिकारी आपस में चर्चा इस बात की चर्चा कर रहे थे की उनके यहां के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों और मौखिक आदेश के तहत रखे गए कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों की तरह वेतन आ रहा है। अधिकारी एक दूसरे से पूछते रहे की आपके यहां के कितने कर्मचारियों का वेतन नियमित कर्मचारियों की तरह आ रहा है। तो कई अधिकारियों ने अनभिज्ञता जाहिर करते रहे। जब मंत्री ने समीक्षा बैठक पूरा करने के बाद बाहर निकले तो democrecy.in ने उनसे सवाल किया तो उन्होंने भी कहा की बैठक में ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई। लेकिन आप पूछ रहे है तो विभागीय अधिकारी से जानकारी लेंगे। जरूरत पड़ी तो जांच भी कराएंगे।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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