इंदिरा प्रियदर्शनी बैंक घोटाला : 44 उद्योगपति, व्यापारी और नेता थाने में तलब, होगी पूछताछ, गिरफ्तारी भी संभव

रायपुर। इंदिरा प्रियदर्शिनी बैंक घोटाले में कोतवाली पुलिस ने 44 उद्योगपति, व्यापारी और राजनीति से जुड़े लोगों को नोटिस जारी किया है। सभी को पूछताछ के लिए 11 अगस्त को थाने में बुलाया गया है। पूछताछ के बाद कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया जा सकता है। राजधानी रायपुर के इस बैंकवमे 17 साल पहले 24 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ था।
पुलिस के अनुसार बैंक से पैसा निकाला गया और 16 अलग अलग कंपनियों में पैसा डाला गया। इसलिए ये 16 कंपनियां जांच के दायरे में है। जिन कंपनियों में पैसा जमा हुआ उनमें से 12 कंपनियां जगदलपुर की हैं। इन 12 कंपनियों को सीए के बेटे नीरज जैन ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर खोला था। इन्हीं कंपनियों में बैंक का पैसा जमा हुआ है। उसके बाद कंपनियां बंद हो गईं। पुलिस को शक है कि बैंक के पैसों का घोटाला करने के लिए इन कंपनियों को खोला गया। 2006 के जांच में भी नीरज को गिरफ्तार किया था। वह कुछ दिन जेल में बंद रहा, अभी वह जमानत पर है। दोबारा जांच शुरू होने के बाद से वह फरार है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। इस बीच खातों की जांच के दौरान 44 उद्योगपति, कारोबारी और राजनेता का नाम सामने आया है। उन्हें नोटिस जारी किया गया। घोटाले में राज्य के अलावा महाराष्ट्र के चार उद्योगपति भी शामिल हैं, जिनके खाते में घोटाले का पैसा जमा हुआ है।
कोतवाली थाना में दर्ज इंदिरा बैंक के दो केस की सुनवाई रायपुर कोर्ट में चल रही है। इसमें पिछले 9 साल से केस के 12 आरोपी कोर्ट में उपस्थित ही नहीं हो रहे हैं। हर बार मेडिकल का आवेदन भेज देते हैं। इस पर उपमहाधिवक्ता संदीप दुबे ने कोर्ट में आपत्ति की है। उन्होंने कहा कि इतना लंबा बीमार कौन होता है। क्यों कोई कोर्ट में पेश नहीं होते हैं। कोर्ट ने सभी 12 आरोपियों को समंस जारी किया है। उन्हें 11 अगस्त को उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
इस मामले के मुख्य आरोपी तत्कालीन मैनेजर उमेश सिन्हा का नार्को टेस्ट बेंगलुरु के फोरेंसिक लैब में 2007 में हुआ था। यह रिपोर्ट लिफाफे में बंद पुलिस के पास पहुंची। सरकार बदलने के बाद 2019 में दोबारा लैब को चिट्ठी लिखकर रिपोर्ट मांगी गई। इस रिपोर्ट को पुलिस ने कोर्ट से वापस लिया है। इसी के आधार पर आगे की जांच शुरू की गई है। रिपोर्ट में चौकाने वाले नाम हैं।
00 शेयर में पैसा किया गया निवेश
पुलिस ने बैंक के तत्कालीन मैनेजरं उमेश सिन्हा से लंबी पूछताछ की है। उमेश ने बयान दिया है कि घोटाले का पैसा शेयर मार्केट में निवेश किया गया है। जिन शेयर मार्केट की जानकारी दी गई है। वह वास्तविकता में नहीं है। सिर्फ कागजों में पर संचालित था और उसमें निवेश भी हो गया। इन कंपनियों की जानकारी निकाली जा रही है।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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