देश का पहला राज्य जहां स्कूलों की पुस्तकें द्विभाषी होगी – त्रिवेदी

बिलासपुर। पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी का कहना है कि छत्तीसगढ़ देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां स्कूलों की पुस्तकें द्विभाषी होगी। हर क्षेत्र के बच्चे पाठ्यक्रम को हिंदी के अलावा अपनी बोली में भी पढ़ और समझ सकेंगे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हमारा काम पुस्तक छापने के बाद संकुल केंद्रों तक पहुंचाना है। उसे स्कूलों तक पहुंचाने का काम संकुल प्रभारी का है।

श्रीत्रिवेदी ने छत्तीसगढ़ भवन में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि कई बाधाओं और रुकावटों के बावजूद पिछले साल निगम ने समय पर पुस्तकों का प्रिंटिंग करके संकुलों तक पहुचाया। इस वर्ष भी समय पर पुस्तके स्कूलों तक पहुंचेगी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष से पुस्तकों की क्वालिटी पहले की तुलना में बेहतर होगा। कागज और प्रिंटिंग दोनों की क्वालिटी पहले से कहीं बेहतर होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 26 जनवरी को घोषणा किया था कि 20 भाषाओं में स्कूल की किताबें छापेंगे। उनकी घोषणा का अक्षरशः पालन किया जा रहा है। देश का पहला राज्य है छत्तीसगढ़ जहां स्कूलों की किताबें द्विभाषी होगी। किताब के एक पेज में पाठ्यक्रम हिंदी में होगा तो उसके ठीक सामने के पेज में गोंडी, हल्बी, उरांव, छत्तीसगढ़ी, मराठी और बांग्ला में होगी। ताकि संबंधित क्षेत्र के बच्चे हिंदी के अलावा अपनी मातृभाषा में भी पाठ्यक्रम को पढ़ और समझ सके। हर किताब दो भाषाओं या बोलियों में होगी।

00 बात ऊपर तक पहुंचाऊंगा

रेत चोरी और चोरों की गाड़ियों से हो रहे हादशों को लेकर पूछे गए सवाल पर श्री त्रिवेदी ने कहा की मामला गंभीर है। हर माँ-बाप के लिए बच्चे अनमोल होते है। यदि इस तरह की दुर्घटनाऐं हो रही है तो चिता का विषय है। पुलिस को स्कूल लगने और छूटने के समय भारी वाहनों की आवाजाही रोकनी चाहिए। रही बात रेत चोरों की बात ऊपर तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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