बिलासपुर। संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की 131वीं जयंती के अवसर पर अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर में “डॉ भीमराव अंबेडकर के चिंतन की समसामयिक प्रासंगिकता” विषय पर ऑनलाईन व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में श्रीशंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी भिलाई के कुलपति एस एल निगम ने कहा कि बाबा साहेब स्वतंत्रता के साथ-साथ सामाजिक समानता के हिमायती थे। बाबा साहेब ने 25 नवंबर 1949 को संविधान सभा के समक्ष दिए अपने अंतिम भाषण में कहा था कि हम भारत को सर्वश्रेष्ठ संविधान दे रहे हैं, जिसमें सभी के अधिकार और सुरक्षा समाहित है, जिसके पालन की जिम्मेदारी भावी पीढ़ी की रहेगी। उन्होंने अम्बेडकर को राष्ट्रनेता बताते हुए कहा कि बाबा साहेब को एक वर्ग विशेष का नेता मानना उनकी अवमानना है। वे समूचे राष्ट्र के नेता थे, गाँधी, नेहरू के साथ वैचारिक मतभेद जरूर थे, परन्तु राष्ट्र हित में वे एक निष्कर्ष पर पहुंचते थे। वे ब्राह्मणों के खिलाफ नहीं थे वरन ब्राह्मणवाद के खिलाफ थे, जो मानवमात्र को जाति के नाम पर वर्गभेद करता है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सतीशचंद्र वर्मा माननीय महाधिवक्ता छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर ने बाबा साहेब के जीवन वृत्त पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि बाबा साहेब ने महान साहसिक कार्य किया, उन्होंने तमाम विषम परिस्थितियों के बावजूद नकारात्मक को मिटाकर सकारात्मक कार्य किया और इसी वजह से संविधान में मानव मूल्यों की सुरक्षा हो पायी। वेबिनार की अध्यक्षता करते हुए आचार्य अरुण दिवाकर नाथ वाजपेयी माननीय कुलपति अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि अम्बेडकर दलित, पिछड़े, सीमांत, शोषित की आवाज थे। उनकी सोच अत्यंत वैज्ञानिक थी। वे एक राष्ट्रवादी नेता थे और पूरे राष्ट्र के हित की बात करते थे। उन्होंने गांधी, नेहरू और अंबेडकर को भारतीय राजनीति के महान नेता बताया और कहा कि पंडित मदनमोहन मालवीय जैसे महान सख्शियत को भी याद करने की आवश्यकता है जिनके समन्वित प्रयास से पूना समझौता हुआ और संविधान में दलित, पिछड़ों के अधिकार सुरक्षित हो पाया। उन्होंने “गढ़बो नवा विश्वविद्यालय” का संकल्पना दिया और कहा कि भारत की आजादी की 75 वर्षगाँठ पर पूरा देश अमृत महोत्सव मना रहा है, हम भी अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर में वर्ष भर राष्ट्रीय और स्थानीय महापुरुषों की याद में कार्यक्रम आयोजित करेंगे। जिसमें बाबा साहेब अंबेडकर शोधपीठ की स्थापना भी हो सकती है। ई राघवेंद्र राव, शहीद नंदकुमार पटेल जैसे महान माटीपुत्रों की याद नें भी कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। डॉ एस आर कमलेश अतरिक्त संचालक उच्च शिक्षा एवं प्राचार्य ई राघवेंद्र राव स्नातकोत्तर विज्ञान महाविद्यालय बिलासपुर ने कहा कि सामाजिक विषमताओं को दूर करने के लिए बाबा साहेब ने गंभीर चिंतन किया। उन्होंने सामाजिक कुरीति अश्पृश्यता के अंत कर समानता की स्थापना के लिए जीवन पर्यंत कार्य किया।वे लोकतंत्र की सफलता के लिए नैतिकता और सामाजिक समानता को आवश्यक मानते थे। विधि मंत्री के रूप में हिन्दू कोड बिल के माध्यम से स्त्री पुरुष की समानता महान कार्य था। वेबिनार के आरंभ में डॉ एच एस होता छात्र कल्याण अधिष्ठाता एवं वेबिनार के सहसंयोजक ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि बाबा साहब की जयंती पर एक साथ एक मंच पर इतने विद्वानों के विचार को सुनना एक महान अवसर की उपलब्धि होगी और डॉ अम्बेडकर को विस्तार से जानने का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम के संयोजक डॉ सुधीर शर्मा कुलसचिव अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया करते हुए कहा कि राष्ट्र के महान नेता, देशभक्त, चिंतक, कानूनविद, संविधान निर्माता बाबा साहेब को सुनने और समझने का अवसर प्राप्त हुआ, उन्हेंने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के आभार व्यक्त किया। डॉ मनोज सिन्हा कार्यक्रम समन्वयक राष्ट्रीय सेवा योजना एवं सहसंयोजक वेबिनार ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया। इस वेबिनार में देश के विभिन्न राज्यों, विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्राचार्य, प्राध्यापक, राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी एवं स्वयंसेवक सहित लगभग 350 प्रतिभागी उपस्थित थे, जिनमें डॉ विनोद खन्ना चंडीगढ़, डॉ संजय तिवारी जबलपुर, डॉ अपर्णा नेगी शिमला, डॉ समता जैन, डॉ अम्बरीष गर्ग, डॉ सुमन भट्टाचार्य, कमलेश कुमार शुक्ला, प्रो बी के पटेल, भोजराम पटेल, ब्रजेन्द्र शुक्ला, डॉ डी के पांडेय, डॉ सुमन भट्टाचार्य, डॉ शुभराजा पांडेय, डॉ बसंत अंचल, डॉ चंद्रशेखर सिंह, डॉ गौरव साहू, सौमित्र तिवारी डॉ ए पी वर्तमा, डॉ कमल प्रसाद चंद्र, डॉ शरद कुमार देवांगन, डॉ पी एल आदिले, डॉ बी एल साय, डॉ देवेंद्र शुक्ल, विकास शर्मा, डॉ शिवदयाल पटेल, अजय पटेल, डॉ के के सिन्हा, राहुल जांगडे, मंजू माधुरी वाजपेयी, सुनीता द्विवेदी, आभा पटेल, आकांक्षा दुबे, आकाश साहू, आलोक दीक्षित, ब्रिजेशवकुमार साव आदि की महत्वपूर्ण सहभागिता रही।
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