बिलासपुर। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि मनरेगा देश के सबसे गरीब और वंचित वर्ग के लिए रोजगार का सबसे बड़ा सहारा रही है। मनरेगा में काम की गारंटी थी जबकि जी राम जी में काम की गारंटी नहीं है। उसका नाम भी बदलकर मिशन कर दिया है। गारंटी और मिशन में अंतर है। कोरोना महामारी जैसे संकट काल में भी इस योजना ने करोड़ों मजदूरों को सम्मानजनक आजीविका दी। ऐसे में इस योजना को कमजोर करना सीधे-सीधे गरीब मजदूरों के खिलाफ है।
उन्होंने 100 दिन से 125 दिन काम देने के दावे को भी “सिर्फ एक चालाकी” करार दिया। सिंहदेव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार आने के बाद से लगभग 70 प्रतिशत गांवों में अघोषित रूप से काम नहीं दिया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर भी पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान मनरेगा के तहत औसतन सिर्फ 38 दिन का ही काम मिला है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब 100 दिन का काम कभी दिया ही नहीं गया, तो 125 दिन का दावा किस आधार पर किया जा रहा है?
सिंहदेव ने कहा कि मनरेगा मजदूरों का कानूनी अधिकार था, जिसे अब एक प्रशासनिक सहायता में बदला जा रहा है, जो पूरी तरह केंद्र सरकार की मर्जी पर निर्भर होगी। इससे मजदूरों का अधिकार खत्म होकर उनकी स्थिति सरकार की कृपा पर टिक जाएगी।
उन्होंने भाजपा पर भगवान राम के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि “V.B.G.RAM.G.” में कहीं भी भगवान राम नहीं हैं। यह सिर्फ एक फुल फॉर्म है विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)। भाजपा एक बार फिर राम के नाम पर जनता को गुमराह कर रही है।
टी.एस. सिंहदेव ने विस्तार से बताया कि पहले मनरेगा में हर परिवार को न्यूनतम 100 दिन के काम की कानूनी गारंटी थी, पूरे साल काम की मांग की जा सकती थी, कानूनी न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित थी और ग्राम पंचायत के माध्यम से अपने ही गांव में रोजगार मिलता था। मजदूरी का पूरा भुगतान केंद्र सरकार करती थी, जिससे राज्य सरकारों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता था। लेकिन नए “जी राम जी” मॉडल में मजदूरों की कानूनी गारंटी खत्म कर दी गई है। काम केवल केंद्र द्वारा चुने गए गांवों में मिलेगा, फसल कटाई के समय काम नहीं दिया जाएगा, मजदूरी सरकार अपनी मर्जी से तय करेगी और राज्य सरकारों को मजदूरी का 40 प्रतिशत हिस्सा खुद उठाना होगा। ऐसे में खर्च बचाने के लिए मजदूरों को काम न दिए जाने की पूरी आशंका है।
कुल मिलाकर, टी.एस. सिंहदेव की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने मनरेगा को लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
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