कौड़ी काम का नहीं 200 करोड़ का सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, न डॉक्टर, न नर्स और न ही वार्ड ब्वाय, कांग्रेस नेता ने दी आंदोलन की चेतावनी

बिलासपुर। 200 करोड़ के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल को प्रधानमंत्री के हाथों लोकार्पण हुए डेढ़ साल हो गए है। लेकिन यहां न तो डॉक्टर है, न ही नर्स है। करोड़ों के मेडिकल उपकरण को लगाए तक नहीं गए है। ढाई सौ मरीजों के लिए बने इस हॉस्पिटल में आक्सीजन प्लांट तक नहीं लगा है। नतीजा ये है मरीज आते है तो उन्हें जिला अस्पताल और सिम्स रिफर कर दिया जाता है। कुल मिलाकर करोड़ो का हॉस्पिटल कौड़ी काम का नहीं है। यही कारण है कांग्रेस नेता विजय केशरवानी ने जन आंदोलन करने की चेतावनी दी है।

कांग्रेस नेता विजय केशरवानी प्रेसवार्ता आयोजित कर कहा कि 200 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 220 बिस्तरों वाला सुपर स्पेशलिटी अस्पताल आज छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। स्पेशलिटी हॉस्पिटल का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों लोकार्पण किया गया था। इसके बाद मुख्यमंत्री ने इसका निरीक्षण किया था। लेकिन मरीजों का इलाज यहां नहीं हो रहा है। भवन तैयार है, लेकिन जीवनरक्षक सुविधाओं के अभाव में गंभीर मरीजों को अब भी दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेता विजय केशरवानी ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए सवालों की झड़ी लगा दी है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च करके केवल एक इमारत नहीं बनवाई थी, बल्कि ऐसा अस्पताल बनाया था जहां गरीब, किसान, मजदूर और आम नागरिक को इलाज के लिए आधुनिक सुविधाओं के साथ काबिल डॉक्टर मिल सके। 29 अक्टूबर 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों लोकार्पण कराने और मुख्यमंत्री का निरीक्षण करने के बाद उम्मीद थी कि बिलासपुर संभाग के लोगों को हार्ट, किडनी, न्यूरो सहित गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अब रायपुर, नागपुर, हैदराबाद या अन्य बड़े शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। लेकिन डेढ़ साल बाद भी अस्पताल की तस्वीर पूरी तरह नहीं बदली। यही कारण है कि अब सवाल उठ रहा है कि क्या केवल भवन बनाकर और फीता काटकर अस्पताल शुरू मान लिया जाता है, या फिर डॉक्टर, उपकरण, आईसीयू, कैथ लैब, ऑक्सीजन प्लांट, प्रशिक्षित स्टाफ और 24 घंटे इमरजेंसी जैसी सुविधाएं भी उसकी पहचान होती हैं ?
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल या फिर सिर्फ रेफरल सेंटर ?
श्री केशरवानी ने कहा कि सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की पहचान उसकी भव्य इमारत से नहीं बल्कि उसकी स्वास्थ्य सेवाओं से होती है। यहां 24 घंटे आपातकालीन चिकित्सा सेवा उपलब्ध हो, अत्याधुनिक आईसीयू की व्यवस्था हो, कैथ लैब हो, ऑक्सीजन प्लांट होनी चाहिए। हृदय रोग, किडनी और न्यूरो के विशेषज्ञ डॉक्टर हो, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ, तकनीकी कर्मचारी के अलावा गंभीर मरीजों के लिए लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस की व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन अभी हॉस्पिटल से हार्ट, किडनी और ब्रेन से जुड़े गंभीर मरीजों को कई बार सिम्स मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल या अन्य निजी संस्थानों में रेफर करना पड़ रहा है। यदि सुपर स्पेशलिटी अस्पताल भी गंभीर मरीजों का इलाज नहीं कर पा रहा है, तो फिर जनता को इसका वास्तविक लाभ कब मिलेगा ?
200 करोड़ खर्च, फिर भी जीवनरक्षक सुविधाओं का इंतजार
विजय केशरवानी ने सरकार से कई गंभीर सवाल पूछे हैं। उनका कहना है कि 200 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट क्यों नहीं ? कार्डियोलॉजिस्ट उपलब्ध होने के बावजूद कैथ लैब क्यों नहीं ? गंभीर मरीजों के लिए पूर्ण सुविधायुक्त एंबुलेंस क्यों नहीं ? नियमित विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति अब तक क्यों नहीं की गई है ? नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी कर्मचारियों की स्थायी भर्ती क्यों नहीं हुई है ? आपातकालीन सेवाओं के लिए डॉक्टरों और कर्मचारियों की उपलब्धता तथा आवास व्यवस्था क्यों सुनिश्चित नहीं की गई है ?
दिलीप सिंह जूदेव के नाम पर अस्पताल, लेकिन क्या उनकी विरासत के अनुरूप मिल रही सुविधाएं ? इस अस्पताल का नाम छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ नेता स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव के नाम पर रखा गया है। यह नामकरण बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला के आग्रह पर किया गया था। कांग्रेस का कहना है कि दिलीप सिंह जूदेव केवल एक राजनीतिक व्यक्ति का नाम नहीं है बल्कि जनभावनाओं का प्रतीक हैं। ऐसे में उनके नाम पर बने अस्पताल को पूरी क्षमता से संचालित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
इसी के साथ कांग्रेस ने यह राजनीतिक सवाल भी उठाया है कि यदि भविष्य में इस अस्पताल को किसी निजी संस्था को सौंपने की कोशिश होती है, तो क्या बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला जनता के साथ खड़े होंगे ? कांग्रेस ने दावा किया कि जनता के बीच यह आशंका लगातार बढ़ रही है कि कहीं सरकारी धन से बने इस अस्पताल को भविष्य में निजी हाथों में देने की तैयारी तो नहीं चल रही। सरकार को ये स्पष्ट करना चाहिए कि कही हॉस्पिटल को निजीकरण करने की कोई योजना तो नहीं है ? यदि नहीं, तो सरकार इस विषय पर श्वेत पत्र जारी करे ? श्री केशरवानी ने ऐलान कर दिया है कि जनता के स्वास्थ्य का अधिकार के लिए वे आंदोलन करेंगे। यह लड़ाई किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं है। यह लड़ाई बिलासपुर की जनता के स्वास्थ्य अधिकार की लड़ाई है। बिलासपुर की जनता ने केवल एक भवन नहीं मांगा था।जनता ने ऐसा अस्पताल मांगा था जहां गरीब, किसान, मजदूर और आम नागरिक को समय पर इलाजा हो सके। यदि सरकार ने तत्काल व्यवस्थाएं पूरी नहीं कीं और निजीकरण की आशंका पर स्थिति स्पष्ट नहीं की कांग्रेस पार्टी जनता के अधिकार के लिए चरणबद्ध आंदोलन करेगी।

00 केशरवानी ने उठाए जनता के सात बड़े सवाल
01  220 बिस्तरों वाला अस्पताल पूरी क्षमता से कब शुरू होगा ?
02  विशेषज्ञ डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी कर्मचारियों की नियमित भर्ती कब होगी ?
03  ऑक्सीजन प्लांट, कैथ लैब और आवश्यक उपकरण कब उपलब्ध होंगे ?
04  गंभीर मरीजों को रेफर करने की मजबूरी कब समाप्त होगी ?
05   24 घंटे इमरजेंसी सेवा और लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस कब शुरू होगी ?
06  आपातकालीन सेवाओं के लिए डॉक्टरों और स्टाफ की पूरी व्यवस्था कब होगी ?
07  क्या अस्पताल को निजी हाथों में देने की कोई योजना है? यदि नहीं, तो सरकार स्पष्ट घोषणा क्यों नहीं करती?
00 कांग्रेस की प्रमुख मांगें
00  ऑक्सीजन प्लांट तत्काल स्थापित किया जाए।
00  कैथ लैब और सभी आवश्यक आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।
00  विशेषज्ञ डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी कर्मचारियों की नियमित नियुक्ति हो।
00  24 घंटे इमरजेंसी सेवा तत्काल शुरू की जाए।
00  गंभीर मरीजों के लिए पूर्ण सुविधायुक्त लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाए।
00  आपातकालीन सेवाओं के लिए डॉक्टरों और कर्मचारियों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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