रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के पेपर लीक मामले में एक प्रोफेसर सहित 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पेपर लीक करने के लिए प्रोफेसर ने जबरदस्त तरीका अपनाया है। लिफाफे में बंद पेपर को एंडोस्कोपी कैमरे से स्कैन किया और 4 से 5 छात्रों को 12 – 12 हजार रुपए में बेच दिया। इसके बाद छात्रों ने पैसा कमाने के लिए कई छात्रों को पेपर बेचा। यहीं से मामला बिगड़ गया।
DCP क्राइम एंड साइबर स्मृतिक राजनाला ने बताया कि 20 अगस्त को थाना तेलीबांधा में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में एक पेपर लीक का मामला सामने आया था। बीएससी सेकंड ईयर के सेकंड सेमेस्टर का कीट विज्ञान का पेपर लीक हुआ था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर पकड़ते हुए जांच शुरू की। जांच में दुर्ग के भारती कॉलेज के प्रोफेसर का नाम सामने आया। इसके बाद अलग-अलग जिलों में जांच टिम रवाना किया गया। उन सभी छात्रों को गिरफ्तार किया गया जो पेपर खरीदे थे। पेपर लीक के मास्टरमाइंड प्रोफेसर योगेश सोनकेसरिया को भी गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में पता चला एक पेपर पहले भी लीक किया गया था।
पुलिस की पूछताछ में आरोपी प्रोफेसर ने बताया कि 7 अगस्त को बीएससी फर्स्ट ईयर का प्लांट पैथोलॉजी का पेपर भी लीक किया है। बीएससी के सेकंड सेमेस्टर का पेपर 20 तारीख को भी लीक किया गया है। इस पेपर को उसने 2 से 3 स्टूडेंट को 11 से 12 हजार रुपए में बेचा। फिर इन स्टूडेंट के माध्यम से दूसरे स्टूडेंट तक यह पेपर पहुंचा है। मास्टरमाइंड प्रोफेसर ने बताया कि ढाई हजार रुपए में मार्केट से एंडोस्कोपी कैमरा खरीदा था। उस कमरे के माध्यम से बंद लिफाफे में छोटा सा छेद करके उसके नीचे में कैमरा अंदर घुसाकर पूरा पेपर स्कैन किया। इसके बाद आरोपी प्रोफेसर ने क्वेश्चन पेपर को हाथ से लिखकर बेचा है। अभी इस पेपर लीक मामले में 6 आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। इसमें दो से तीन और लोग हो सकते हैं।
00 परीक्षा प्रभारी ने किया था रिपोर्ट
थाना तेलीबांधा में डॉक्टर एनआर रंगारे ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर में वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं स्नातक परीक्षा प्रकोष्ठ प्रभारी के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि 20 अगस्त को प्रदेश के 28 कृषि महाविद्यालय में बीएससी सेकंड ईयर के द्वितीय सेमेस्टर के कीट शास्त्र की परीक्षा होनी थी। इसके पहले सुबह 8:40 कृषि महाविद्यालय अनुसंधान केंद्र कवर्धा के ईमेल पर प्रश्न पत्र लीक होने की सूचना मिली। साथ ही छात्रों एवं छात्र प्रतिनिधियो ने विश्वविद्यालय को व्हाट्सएप के माध्यम से प्रश्न पत्र, प्रश्नों के कंटेंट वायरल होने की जानकारी दी। प्राप्त सूचना और उपलब्ध सामग्री के आधार पर प्रश्न पत्र सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित होने की पुष्टि हुई थी।
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