बिलासपुर। कांग्रेस नेता अमित तिवारी अरपा पार को अलग से नगर निगम बनाए जाने की मांग को लेकर अनशन में बैठ गए है। उनके अनशन में बैठते ही अरपा पार को नगर निगम बनाए जाने की चर्चा शुरू हो गई है। इस अनशन से जिले के राजनैतिक समीकरण को उलट पलट कर सकता है। इस मांग के पूरा होने या नहीं होने का असर शहर विधायक अमर अग्रवाल, उप मुख्यमंत्री अरुण साव और केंद्रीय मंत्री तोखन साहू की राजनीति प्रभावित होती नजर आ रही है।
पिछले कई साल से अरपा पार को अलग नगर निगम बनने की मांग उठ रही है। लेकिन कभी इस मांग को गंभीरता से नहीं लिया गया। लेकिन विधानसभा चुनाव में शहर विधायक अमर अग्रवाल ने अरपा पार को अलग नगर निगम बनाने की घोषणा करके इस मांग को गंभीर बना दिया। साफ साफ घोषणा किया है कि भाजपा की सरकार बनी तो अरपा पार को अलग से नगर निगम बना दिया जाएगा। चुनाव हुआ और प्रदेश में भाजपा की सरकार बन गई। घोषणा करने वाले अमर अग्रवाल चुनाव भी जीत गए। इसके बाद आरपार रहने वालों की उम्मीद और बढ़ गई। प्रदेश में भाजपा की सरकार को बने ढाई साल हो गए है लेकिन अरपा पार को अलग नगर निगम बनाने कोई सुगबुगाहट सुनाई नहीं दे रही है। यही नहीं चुनाव में वादा करने वाले बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल भी खामोश हो गए है। इसके कारण अरपा पर रहले वालों की धैर्य टूटने लगा है। यही कारण है कि अब इस मामले को लेकर कांग्रेस नेता अमित तिवारी बड़ा आंदोलन का ऐलान कर दिया है। अब शहर विधायक अमर अग्रवाल इतने पावरफुल नेता नहीं रहे कि अपने घोषणा पत्र में किए वादा को पूरा कर सके। सरकार के पावरफुल नेताओं के साथ उनका तालमेल भी बिगड़ा हुआ दिख रहा है। लेकिन बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल के घोषणा को नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव पूरा कर सकते है। क्योंकि वे उसी विभाग के मंत्री है जिस विभाग द्वारा इस घोषणा पत्र को पूरा करने के लिए कदम बढ़ाएगा। दमदारी से कोशिश होगी तो अरपा पार नगर निगम बन सकता है। लेकिन सवाल ये उठता है कि श्री साव दमदार कोशिश क्यों करे ? क्योंकि उन्हें चुनाव तो लोरमी से लड़ना है। बता दे कोई नेता तब तक कोई बड़ा फैसला नहीं करता जब तक उसे कोई बड़ा राजनैतिक या आर्थिक लाभ नहीं होता। आर्थिक लाभ तो मंत्री बनने के बाद हो ही जाता है, यह जगजाहिर है। इसके बाद राजनैतिक लाभ ही मुख्य एजेंडे में रह जाता है। अब सवाल ये उठता है कि अरपा पार को अलग नगर निगम बनाने से श्री साव को कौन सा राजनीतिक लाभ होगा ? राजनीतिक लाभ का मतलब है चुनाव और चुनाव का मतलब है बिलासपुर से चुनाव लड़ना। यदि भाजपा के कार्यकर्ता एक राय होकर पार्टी को यह संदेश दे दे कि श्री साव को बिलासपुर से टिकट देगी तो उन्हें जीता दिया जाएगा। तो शायद श्रीसाव कुछ उत्साहित हो जाए। वैसे भी अक्सर इस बात की चर्चा होती है कि अरुण साव लोरमी से निकलकर बिलासपुर से राजनीति करने के लिए उत्सुक है। बिलासपुर सालों से उनके लिए कर्मभूमि रही है। यदि ऐसा हुआ तो अरपा पार सरकंडा को अलग नगर निगम बनाने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। इलहाल अपनी मांग को लेकर अमित तिवारी अनशन में बैठ गए है। अरपा पार सरकंडा में उन्हें लोगों का समर्थन भी मिल रहा है।
00 तोखन के लिए भी खुल सकता है रास्ता – अरुण साव यदि बिलासपुर का रुख करेंगे तो केंद्रीय मंत्री तोखन साहू के लिए भी रास्ता बन जाएगा। लोरमी खाली होगी तो अगली बार तोखन साहू वहां से विधानसभा चुनाव लड़कर प्रदेश की राजनीति में आ सकते है। बताया जा रहा है कि तोखन साहू भी केंद्र की राजनीति से निकलकर राज्य की राजनीति में सक्रिय होना चाहते है।
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