केवल प्रधानमंत्री जी के मंत्र से काम चलने वाला नहीं है, रोग का निदान तो औषधि से ही होता है- महंत राम सुन्दर दास

शिवरीनारायण। देश के न्यायपालिका की सक्रियता, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, केंद्र तथा राज्य सरकारों के समुचित प्रयत्न से भले ही कोरोना का स्तर पूरे देश में पहले से कम हुआ है किंतु अभी यह पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ इसमें और भी समय लगेंगे इसलिए सतर्कता निरंतर बनाए रखना होगा यह बातें छत्तीसगढ़ राज्य गौसेवा आयोग के अध्यक्ष एवं श्री दूधाधारी मठ तथा श्री शिवरीनारायण मठ पीठाधीश्वर राजेश्री महन्त रामसुन्दर दास जी महाराज ने अभिव्यक्त की उन्होंने कहा कि देश में वैक्सीन की कमी के कारण टीकाकरण का रफ्तार कम होते जा रहा है, जो की चिंता का विषय है, जब रोग नियंत्रण में आ रहा हो उस समय हमें दोहरे उत्साह के साथ उसके निदान के लिए वैक्सीनेशन की अभिक्रिया को बढ़ानी चाहिए किंतु यहां यह शिथिल पढ़ता हुआ नजर आ रहा है। देश के प्रमुख चिकित्सा विशेषज्ञों से लेकर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भी वैक्सीनेशन को ही कोरोना महामारी के निदान का मूल उपाय बताया है उसके पश्चात भी हम आज पर्यंत अपने देश को उचित मात्रा में वैक्सीन उपलब्ध करा पाने में असमर्थ रहे हैं यह बहुत बड़ी विडंबना है। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने कोरोना से निपटने के लिए संपूर्ण देशवासियों को जहां बीमार वहां उपचार का मंत्र दिया है लेकिन केवल मंत्र से काम चलने वाला नहीं है मंत्र के साथ-साथ पर्याप्त मात्रा में देश को संसाधन उपलब्ध करानी ही होगी। यहां तो रोग के निदान में काम आने वाला ब्रह्मास्त्र (वैक्सीन) की ही कमी है! बिना ब्रह्मास्त्र के हम कोरोना से जंग कैसे जीत पाएंगे? शास्त्रों में कहा गया है कि रोग घटे कछु औषधि खाये अर्थात रोग का निदान तो औषधि से ही होता है, इस बात को माननीय प्रधानमंत्री जी और उनके संपूर्ण मंत्रिमंडल को समझना होगा। कांशी के डॉक्टरों के साथ वर्चुअल बैठक में डॉक्टरों से वार्तालाप करते हुए प्रधानमंत्री जी के भावुक हो जाने की घटना पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राजेश्री महन्त जी ने कहा कि भावुक होना अच्छी बात है, किंतु हमें अपनी भावना पर नियंत्रण रखनी चाहिए इससे पद की गरिमा और मर्यादा बनी रहती हैं। सेनापति हमेशा अपने सैनिकों के मनोबल को बनाए रखता है, कोरोनावायरस के इस युद्ध में डॉक्टर ही हमारे महान सैनिक हैं उनके सामने ही उनके दिवंगत साथियों को श्रद्धांजलि देकर भावुक हो जाने से उनके आत्मबल को धक्का लगेगा जो कि उचित नहीं है। लोगों ने कोरोना के प्रथम एवं द्वितीय लहर में अपनों को खोया है कई परिवार पूरी तरह से बिखर गए हैं। हम जो कुछ भी प्रेस, मीडिया तथा सरकारी आंकड़ों के माध्यम से देख या सुन पा रहे हैं वह कम ही है, लोग वहां भी मरे हैं जहां इनकी उपस्थिति नहीं है। समय के रहते यदि सरकार तृतीय लहर को रोकने के लिए समुचित उपाय नहीं करती हैं तब न तो जनता माफ करेगी और न हीं ईश्वर। रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज ने लिखा है कि जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी, सो नृप अवसि नरक अधिकारी। समय के रहते महामारी के समुचित निदान के उपाय सरकार को निश्चित रूप से करनी ही चाहिए।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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