बिलासपुर। अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय में मंगलवार को हिंसा मुक्त समाज की रचना में कानून एवं न्याय की भूमिका विषय में वेबिनार का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जाने माने अधिवक्ता विवेक तनखा ने कहा हम अंग्रेजो की न्याय ब्यवस्था पर चल रहे है। न्याय पालिका में अत्यधिक सुधार की जरूरत है।
विषय की शुरुआत में डॉ विमल पटेल ने स्वर्गीय नंदकुमार पटेल के बारे में, उनके व्यक्तित्व के बारे में, उनकी राजनीतिक समझ-दूरदर्शिता एवं जनता से जुड़ाव के बारे में विस्तार से बताया। इस अवसर पर डॉ विवेक बाजपेई ने स्वर्गीय नंद कुमार पटेल के साथ अपनी स्मृतियों को साझा किया और न्यायपालिका के प्रति अपनी पीड़ा को बताया कि 8 साल से हम इतने बड़े नेताओं, कार्यकर्ताओं कि जो हत्या हुई थी उनको आज तक न्याय नहीं मिल पाया। इस घटना के हृदय विदारक दृश्य को देखकर आज भी उनकी रूह कांप जाती है। उन्होंने स्वर्गीय नंद कुमार पटेल को सच्चा देशभक्त जननेता और राजनीति मैं अपनी गहरी पकड़ रखने वाला और राजनेता बताया। मुख्य वक्ता के तौर पर वरिष्ठ अधिवक्ता राज्यसभा सदस्य विवेक तनखा ने स्वर्गीय नंदकुमार पटेल को एक सच्चा देशभक्त और शहीद बताया। इस अवसर पर उन्होंने स्वर्गीय विद्या चरण शुक्ला, स्वर्गीय महेंद्र कर्मा सहित अन्य शहीदों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। उन्होंने वेबिनार के विषय को और इस पूरे वेबीनार के लिए कुलपति प्रोफेसर एडीएन वाजपेई को धन्यवाद दिया तथा इससे बड़ा हिम्मतवाला विषय बताया। उन्होंने इस घटना के प्रति होने वाले कानून की देरी को देरी के लिए विभिन्न कारण कारण समझाए और कहा कि आज भारत देश में न्यायपालिका अंग्रेजों के समय से चली आ रही ब्यवस्था के तहत चल रही है उन्हीं का हम अनुकरण कर रहे हैं। आज न्यायपालिका में अत्यधिक सुधार की आवश्यकता है। भारत देश में आज वर्तमान में तीन करोड़ मामले पेंडिंग है। कोविड-19 की जो महामारी चल रही है उसे देखो तो गिनती और और बढ़ जाती। जो न्यायपालिका की औपचारिकता है उसमें सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने स्वर्गीय महात्मा गांधी, स्वर्गीय मार्टिन लूथर किंग, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी को जन नेता कहा और देश के लिए इन्होंने अपना बलिदान दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्तमान में राजनेता है, जन नेता नहीं है, जो जनता की पीड़ा को समझ सके। उन्होंने न्यायपालिका के सुधार के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए जिनको अगर पालन किया जाए तो न्यायपालिका में आमूलचूल परिवर्तन हो सकता है। इस अवसर पर स्वर्गीय नंद कुमार पटेल विश्वविद्यालय रायगढ़ के कुलपति प्रोफ़ेसर पटेरिया ने ऐसे आयोजनों के लिए अच्छी सोच गहन अध्ययन की बात कही और ऐसे आयोजन भविष्य में किए जाने चाहिए। मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल ने इस घटना को अत्यधिक पीड़ादायक एवं अपने परिवार के लिए कठिन समय वाला बताया। उन्होंने शहीद नंद कुमार पटेल जी को अपने पिता के तौर पर, एक राजनेता के तौर पर, जनमानस की भावनाओं से जुड़ने वाला नेता तथा किसी भी परिस्थितियों में निर्णय लेने वाला बताया। उन्होंने अपने पिता को अपना रोल मॉडल बताया। इस विषय को अत्यधिक महत्वपूर्ण विषय बताया और प्रोफेसर एडीएन बाजपेई को इस विषय को लाने के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रोफेसर अरुण दिवाकर नाथ बाजपेई कुलपति ने अपने उद्बोधन में इस विषय को क्यों चुना, हिंसा मुक्त समाज क्या होता है तथा इसकी रचना में कानून और न्याय की क्या भूमिका होती है। इस विषय को रखने का कारण उनकी गहरी समझ थी उन्होंने इस आयोजन को और इस विषय को स्वर्गीय नंदकुमार पटेल की स्मृति में एक शोध संस्थान खोलने की अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय में बात कही।
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