बिलासपुर। दुर्गा विसर्जन के दौरान दो पक्षों के बीच हुआ विवाद चाकूबाजी तक पहुंच गई। घायल युवक को परिजन सिम्स लेकर पहुंचे लेकिन इलाज में हो रही देरी और अब्यवस्था के कारण उसे लेकर वापस चले गए। घायल युवक को परिजन कहां लेकर गए है इसकी जानकारी रविवार दोपहर तक किसी को नहीं थी।
सभी तस्वीर प्रेस फोटोग्राफर अप्पू नवरंग ने ली है

घटना शनिवार और रविवार दरमियानी रात की है। आधी रात के बाद मगरपारा के बजरंग युवा मंच और त्रिदेव युवा मंच दो दुर्गोत्सव समितियां अपनी-अपनी दुर्गा प्रतिमा को लेकर विसर्जन करने निकले। दोनों समितियों के लोग अपनी-अपनी टोली के साथ नाचने में ब्यस्त थे। इसी दौरान दोनों समितियों के कुछ युवक आपस मे भीड़ गए। पहले गली-गलौच हुआ, फिर देखते ही देखते मारपीट शुरू हो गई। इसी दौरान एक युवक ने चाकू निकालकर दूसरे पर हमला कर दिया। इस हमले में देव गुप्ता नामक युवक घायल हो गया। बताया जा रहा है कि चाकू से हमला करने वाले युवक का नाम राहुल गेमटे है। चाकू से हमला होने के बाद दोनों समितियों के बीच भगदड़ मच गई। लोग इधर-उधर भागने लगे। आनन फानन में चाकूबाज़ी से घायल पक्ष युवक को लेकर सिविल लाइन थाने पहुंचे। लेकिन कोई भी ज़रूरी लिखा पढ़ी किए बिना ही उन्हें सिम्स अस्पताल जाने को कह दिया गया। थाने से परिजन पहले उस घायल युवक को सिम्स लेकर गए। सिम्स में इलाज के लिए देरी होने पर परिजन उसे लेकर अपोलो ले गए, लेकिन वहां भी उन्हें कोई त्वरित उपचार नहीं मिला। तब उसे अपोलो से प्रथम अस्पताल ले जाया गया और प्रथम से श्रीराम केयर ले जाया गया। लेकिन कहीं सर्जन नहीं मिला तो कहीं बेड उपलब्ध नहीं हुआ। अभी घायल युवक कहां है इसकी खबर किसी के पास नहीं है।

सिम्स के मेडिकल स्टाफ का कहना है कि घायल देव गुप्ता के शरीर पर लगा घाव लगभग 5 सेंटीमीटर गहरा है जो गंभीर श्रेणि का जानलेवा घाव कहा जाएगा। सिम्स स्टाफ ने ये भी बताया कि घायल को उसके परिजन लेकर चले गए हैं। जब घायल को अस्पताल लाया गया और जब उसे वहाँ से दूसरी जगह रिफर किया गया तब तक कोई भी पुलिसकर्मी उसके साथ नहीं नज़र आया। परिजन उसे रायपुर ले गए हैं या कहीं और इस बारे में हमें कुछ नहीं पता।

00सिविल लाईन की घोर लापरवाही
समाचार लिखे जाने तक लगभग रविवार 17 अक्टूबर सुबह 5:00 बजे तक घायल इलाज के लिए भटक रहा है और आरिपियों के खिलाफ़ अब तक FIR भी दर्ज नहीं की गई है। यदि सिविल लाईन पुलिस थोड़ी सी संवेदनशीलता दिखाते हुए घायल की FIR लिखकर नियम मुताबिक ख़ुद उसे अस्पताल लेजाती तो शायद अब तक उसका इलाज शुरू हो चुका होता लेकिन बीती कई घटनाओं को देखते हुए ऐसा लगता है कि सिविल लाईन पुलिस और संवेदनशीलता का आपस में दूर दूर तक कोई संबंध नहीं हैं।

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