बिलासपुर। नगरीय प्रशासन विभाग मंत्रालय रायपुर द्वारा नगर निगम रायगढ में सब इंजीनियर के पद पर कार्यरत याचिकाकर्ता दिलीप उरांव का स्थानांतरण नगर पंचायत चन्द्रपुर कर दिया गया। जिससे क्षुब्ध होकर याचिकाकर्ता ने अधिवक्ता विकास दुबे के माध्यम से उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। याचिकाकर्ता की ओर से यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि याचिकाकर्ता मूलतः नगर निगम रायगढ़ का कर्मचारी है अतः उसकी सेवाएं नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 58 से अधिशासित होती है। इसके अनुसार याचिककर्ता का स्थानांतरण नगर पंचायत में करने का कोई भी प्रावधान नहीं है। अतः नगर निगम के कर्मचारियों को नगर पंचायत में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता।
मामले की सुनवाई जस्टिस संजय के अग्रवाल के सिंगल बेंच में हुई जिसमें उच्च न्यायालय द्वारा याचिकाकर्ता का स्थानांतरण नगर निगम अधिनियम की धारा 58 के उल्लंघन में होना पाते हुए स्थानांतरण आदेश निरस्त कर दिया।
00 हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा
नगर निगम का गठन नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 के तहत होता है जबकि नगर पंचायत नगर पालिका अधिनियम1961 के तहत गठित संस्था है। दोनों संस्थाओं के कर्मचारी सेवा नियम भी अलग अलग है। नगर निगम अधिनियम के अंतर्गत ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो राज्य सरकार को नगर निगम के कर्मचारियों का स्थानांतरण नगर पंचायत में करने का अधिकार देता हो। नगर निगम अधिनियम की धारा 58 में भले ही कर्मचारी को एक नगर निगम से दूसरे नगर निगम में प्रतिनियुक्ति की शर्तों पर भेजने का प्रावधान है परन्तु नगर निगम के कर्मचारी को नगर पंचायत में स्थानान्तरण करने का अधिकार राज्य शासन को नहीं है।
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