डकैती कांड के बाद… क्या टाकेश्वर पाटले के खिलाफ कार्रवाई होगी ? या “अभय… दान… मिल गया…, आखिर किसके इशारे पर लगा रहा था आरोप ?

बिलासपुर। दर्रीघाट डकैती कांड का पर्दाफाश होने के बाद राजनैतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी एकाएक समाप्त हो गया है। नेताओं के बीच की खामोशी को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही है। इसमें से एक चर्चा के अनुसार पर्दे के पीछे दोनों के भी समझौता हो जाने की बात हो रही है। दूसरी ओर यह भी कहा जा रहा है कि जल्द ही टाकेस्वर पाटले के खिलाफ कार्रवाई की गाज गिर सकती है। लेकिन नेताओ की खामोशी से इसकी संभावना कम ही लग रही है।

दर्रीघाट में कांग्रेस नेता के घर हुई डकैती का खुलासा तो पुलिस ने कर दिया है लेकिन राजनैतिक आरोप-प्रत्यारोप का खुलासा होना अभी बाकी है। क्योंकि डकैती पड़ने के साथ ही जिला सचिव टाकेश्वर पाटले और प्रदेश प्रवक्ता अभय नारायण राय के बीच जो आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ था उससे न केवल कांग्रेस की बल्कि पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं प्रदेश प्रवक्ता अभय नारायण राय और महामंत्री अर्जुन तिवारी की इज्जत दांव पर लग गई थी। दांव पे क्या लगी थी पुलिस के खुलासे के पहले तक लोग उन्हें संदेह की नजर से देखने लगे थे। श्रीराय खुद आरोप लगने के बाद अपने आपको असहज महशूस करते नजर आए। अभय नारायण राय ने तो टाकेश्वर पाटले के आरोप का जवाब देते हुए इसे राजनैतिक षड्यंत्र करार दिया था। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा था कि उनकी राजनैतिक हत्या का षड्यंत्र रचा गया है। टाकेश्वर पाटले के कंधे पर बंदूक रखकर कोई और चला रहा है। पुलिस के खुलासे ने भी यह साबित कर दिया है कि कांग्रेस प्रवक्ता का इस मामले में दूर-दूर तक कोई वास्ता नही है। लेकिन सवाल ये उठ रहा है कि टाकेश्वर पाटले ने अपने से वरिष्ठ नेता पर इतने गंभीर आरोप क्यों लगाए ? किसके कहने पर वो अभय नारायण राय पर आरोप लगा रहे थे ? आखिर अभय नारायण राय को निपटाने के किए कौन पाटले का कंधा इस्तेमाल कर रहा था ? क्या इन सवालों पर से परदा कभी उठेगा या मामला रफ-दफा हो जाएगा ? क्योंकि डकैती की खुलासे के बाद से नेताओं की खामोशी तो इसी तरफ इशारा कर रहा है। क्योकि आरोप लगाने वाला तो खामोश हो ही गया है जिनकी इज्जत दांव पे लगी थी उनकी भी खामोशी समझ से परे है। क्या दोनों के बीच कोई आंतरिक समझौता हो गया है या फिर इस खामोशी को आने वाली तूफान के पहले की खामोशी माना जाए ? क्योंकि इसके पहले जिले में कांग्रेस ने दो उदाहरण पेश कर चुकी जिसमे पहला उदाहरण ब्लाक अध्यक्ष तैय्यब हुसैन का और दूसरा मामला ब्लाक अध्यक्ष गोपी थारवानी का है। तैयब हुसैन के खिलाफ शहर विधायक से गाली-गलौच करने के कारण कार्रवाई की गई थी तो गोपी थारवानी के मामले में विवाद बढ़ा तो बाकायदा बैठक आयोजित कर शहर विधायक शैलेश पांडेय को पार्टी से निष्काषित करने का प्रस्ताव पासकर PCC अध्यक्ष को भेज गया था।

गौरतलब है 13 जनवरी 2022 को कांग्रेस के जिला सचिव दर्रीघाट निवासी टाकेश्वर पाटले के घर में सात सदस्यीय सशस्त्र डकैतों ने धावा बोलकर महिलाओ बच्चों और सदस्यों को बंधक बनाया। कट्टे और चाकू की नोक पर डकैती की वरदात को अंजाम दिया। डकैतों ने नगदी रकम लगभग 2.50 लाख रूपये और सोने चांदी के आभूषण लूटकर फरार हो गए थे। घटना के बाद पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही थी। इसी बीच जिला सचिव टाकेश्वर पाटले ने प्रदेश प्रवक्ता अभय नारायण राय का डकैती में होने का आरोप लगा दिया था। उन्होंने SSP को श्रीराय से पूछताछ करने की मांग की थी। हालांकि श्रीराय ने उनके आरोप को सिरे से खारिज कर दिया था।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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