अंधत्व के बावजूद सारंगी के सौ रंगों की साधना कर राजेश ने बनाया वर्ल्ड रिकार्ड, SBI मेंन ब्रांच में है प्रोबेशनरी ऑफिसर

बिलासपुर। वर्तमान समय में पाश्चात्य संगीत के लोकप्रिय होने के कारण हमारे पारंपारिक शास्त्रीय संगीत की सांसें उखड़ने लगी है। जानकारों के अभाव में ‘साज’ और संरक्षण के अभाव में ‘साजिंदे’ विलुप्त होने की कगार पर हैं। अखण्ड भारत का बेहद जटिल मगर कर्णप्रिय साज “सारंगी” भी आज इसी श्रेणी में आ चुका है। पूरे विश्व में इस वाद्ययंत्र को बजाने वाले, बनाने वाले व इसकी तालीम देनेवाले बेहद कम रह गये हैं। सारंगी की शुरुआत सिंध प्रांत (वर्तमान में पाकिस्तान) से होने के बावजूद मुल्तान में ही उस्ताद लाखा खान एवं उस्ताद नदीम खान जैसे कुछेक जानकार बचे हैं। जिनकी बदौलत मुल्तान घराना जीवित है। भारत में गुजरात में कुछ जानकार हैं जो सारंगी बजाते हैं। राजस्थान के मात्र दो जिले जैसलमेर एवं जोधपुर ऐसे हैं जहां सारंगी बजाने और बनानेवाले मौजूद हैं। मगर उनकी पकड़ सिर्फ दिल्लीवान सारंगी में है जबकि मूल सिन्धी सारंगी के जानकार वहां उपलब्ध नहीं हैं।

इस बारे में डी डी आहूजा और विनिता भावनानी ने बताया, कि सारंगी की शुरुआत सिन्ध प्रांत से होने के कारण वहां के सूफियाना गायन एवं कलामों में सिन्धी सारंगी का प्रयोग अनिवार्य रूप से किया जाता था। विश्वविख्यात संत साईं कंवरराम साहब के हर गीत में सिन्धी सारंगी का प्रयोग हुआ है ।
आज इस लुप्तप्राय वाद्ययंत्र को पुनः चलन में लाने का बीड़ा राजेश कुमार परसरामानी ने उठाया है। बेचलर आफ फार्मेसी की डिग्री लेकर राजेश ने पहले फार्मेसी कालेज में लेक्चरर की नौकरी की तत्पश्चात विजया बैंक में प्रोबेशनरी आफिसर के पद पर नियुक्ति हुई। वर्तमान में स्टेट बैंक आफ इण्डिया बिलासपुर की मुख्य शाखा में वे इसी पद पर आसीन हैं।
राजेश कुमार ने शास्त्रीय संगीत की प्रारंभिक शिक्षा राजनादगावँ से उस्ताद हाजरा से हुई है। (जो वर्तमान में दिवंगत हो चुके है), फ़िर बाँसुरी की शिक्षा गुरु-शिष्य परम्परा अनुसार बंगई विश्विद्यालय से शिक्षा प्राप्त पण्डित पार्थ सरकार से बाँसुरी की शिक्षा प्राप्त की, बांसुरी में महारत हासिल की कालांतर में अपने मैहर घराने के गुरु नित्यानंद के निर्देश पर सारंगी वादन आरंभ किया।

00 सौ रंगों वाली सारँगी अर्थात अनंत धुनों वाली सारँगी
सारँगी एक मात्र ऐसा वाद्य यंत्र है, जो दिल के करीब रखकर बजाया जाता है, अर्थात दिल से धुन निकलती है। आज इन्होंने न केवल सारंगी में महारत हासिल की है, बल्कि इन्होंने लुप्तप्राय सिन्धी सारंगी को पुनर्जीवित करने में सफलता प्राप्त की है। पहले सारँगी मुख्यतः लोक धुनों में ही बजती आई है।

00 सिंधी सारँगी शास्त्रीय संगीत पर बजेगी
राजेशकुमार आंखों में रेटिना की बीमारी के कारण दृष्टिबाधित हो चुके हैं, मगर बैंक में सफलतापूर्वक अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करने के साथ ही ये सारंगी में सिद्धहस्त हैं। इसी का परिणाम है कि सबसे तेज सारंगी वादन में इनका विश्वरिकार्ड है।
अविभाजित भारत में सारंगी वादन में मुरादाबादी , हैदराबादी, दिल्ली एवं जयपुर घराने हुआ करते थे। घराना भारतीय शास्त्रीय संगीत में एक शैली होती है। अलग अलग घरानों को प्रस्तुत करने की अलग अलग शैली होती है ,वाद्ययंत्र की जटिलता के कारण साजिंदे कम होते गये और घरानों का चलन अपेक्षाकृत कम होता गया ऐसे में राजेश कुमार परसरामानी ने न केवल सिन्धी सारंगी को पुनः प्रचलन में लाया बल्कि अपनी पूरी संगीत कला क्षमता का प्रयोग करके सिन्धु घराने की स्थापना भी की सारंगी पर डाक्टरेट करके वे सिन्धु घराने को विश्व के अनेक स्थानों पर पहुंचाने का प्रयास करेंगे , राजेश जी से हुई बातचीत के दौरान पता चला कि वो सिंधी सारँगी को काला हीरा कहते हैं।

सिंधी सारँगी के दो घराने है, मुल्तान घराना, सिंधु घराना …सिंधु घराना मीड प्रधान घराना है इसमें तीन उंगलियों का प्रयोग होता है, जबकि मुल्तान घराने में चार उंगलियों का उपयोग होता है, सिंधु घराने में प्रत्येक दो स्वर को एक ऊँगली दी गई है एक ऊँगली से दो सुर बजाये जाते है।सिंधु घराने की सिंधी सारँगी में जोड़ा नही होता, ये एक तार में बजती है।
बिलासपुर के साथ ही पूरे छत्तीसगढ़ प्रांत के लिये यह बेहद गौरव का विषय है कि दल्लीराजहरा की माटी में जन्मा यह फनकार अपनी अनूठी काबिलियत के दम पर अपने साथ पूरे प्रदेश का नाम रोशन कर रहा है राजेश कुमार परसरामानी की इस विलक्षण विधा के कारण ही पिछले वर्ष इनका नाम भारत के पद्म पुरस्कार के लिये भेजा गया था , यह अलग बात है कि तात्कालिक वर्ष उनका चयन नहीं हुआ मगर इनकी अनूठी प्रतिभावान क्षमता, देखकर यह एहसास होता हैं कि वो दिन दूर नही जब ऐसी कई सफलताएं उनके साथ जुड़ी हुई होंगी। क्योंकि सारँगी एक ऐसा वाद्य है जिसकी धुन ह्रदय से प्रवाहित होती हैं, सम्वेदनाओं में उतरती है संगीत साधना ईश्वरीय साधना कही जाती है जो पूरी सृष्टि को मंत्रमुग्ध कर देती है। निश्चित ही राजेश जी की संगीत साधना सारँगी संगीत को एवं स्वयं उन्हें ऊँचे शिखर तक पहुँचायेगी।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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