बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की लाडली बेटी सृष्टि पांडेय वीमेंस ग्रेंड मास्टर बनने की राह में है। अभी वो देश और दुनिया के कई बड़े खिलाड़ियों को मात देते हुए वीमेन फिडे मास्टर है और वीमेंस इंटरनेशनल मास्टर के सारे नाम्स पूरे कर चुकीं है जैसे ही उसे 23 पाइंट्स और मिलेंगे वीमेंस ग्रेंड मास्टर बन जाएंगी। इसके लिए उसे बस एक टूर्नामेंट की दरकार है।

जांजगीर जिले के भनेसर निवासी कामता प्रसाद पांडेय की बेटी सृष्टि शह और मात के खेल “चेस” में महारत हासिल करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी बन गई है। तखतपुर के पास खम्हरिया गांव सृष्टि का ननिहाल है। हालांकि पिता की नौकरी के कारण पूरा परिवार पिछले 15-17 साल से महाराष्ट्र के नागपुर में रह रहे है। वो चेस भी महाराष्ट्र स्टेट की ओर से खेल रहीं है। नागपुर के एक कॉलेज से बीकॉम कर रही सृष्टि छत्तीसगढ़ की एक मात्र चेस खिलाड़ी है जो अंतराष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन कर रही है। लगातार चार साल तक महाराष्ट्र की चैंपियन रही सृष्टि पारिवारिक कार्यक्रम में बिलासपुर पहुंची तो democrecy.in के संवाददाता से उनकी खेल उपलब्धियों और भविष्य को लेकर लंबी चर्चा हुई। चर्चा के दौरान सृष्टि ने बताया कि वो अभी तक जिला स्तर से लेकर राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर की सौ से ज्यादा टूर्नामेंट खेल चुकी है जिसमें से 20 के आसपास अंतराष्ट्रीय टूर्नामेंट शामिल है। दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स उनका पहला अंतराष्ट्रीय टूर्नामेंट था जिसमें उसे ब्रॉन्ज मेडल मिला था। खेल के इस सफर में विश्वनाथ आनंद जैसे कई ग्रेंड मास्टर का भी सानिध्य और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। अभी उनसे कोरोना के कारण लगभग दो महीने तक ऑन लाइन प्रशिक्षण प्राप्त किया। उनसे कॉफी कुछ सीखने को मिला जिससे उनके खेल में सुधार आया है। एक सवाल के जवाब में उसने बताया जब टूर्नामेंट खेलना शुरू किया तो रेंक मिलता गया जो हर टूर्नामेंट के साथ बढ़ता गया। आज वो वीमेन फिडे मास्टर है और वीमेंस इंटरनेशनल मास्टर के लगभग सारे नाम्स पूरी कर चुकीं है, जैसे ही उसे 23 पाइंट्स और मिलेंगे वीमेंस ग्रेंड मास्टर बन जाएंगी। उन्हें बस एक टूर्नामेंट का इंतजार है। एक सवाल के जवाब में सृष्टि ने बताया कि उसे आगे बढ़ाने और प्रोत्साहन देने में मां किंशुक पांडेय और पिता कामता प्रसाद पांडेय का ही हाथ है। हर टूर्नामेंट में उनकी मां साथ होती है। बचपन मे पिता के साथ शौकिया चेस खेलती थी। यहीं से चेस को लेकर उनकी रुचि बढ़ी। लेकिन स्कूल के एक टूर्नामेंट में हार ने उसे जुनूनी बना दिया। इसके बाद उसने चेस में महारत हासिल करने के लिए कोचिंग क्लास जाना शुरू किया फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
00 वन ऑफ द लीजेंड ग्रेंड मास्टर को हराया
सृष्टि ने चर्चा के दौरान बताया कि विदेश में उनका पहला टूर्नामेंट आर्मेनिया के सिखाद और दूसरा वहीं की राजधानी येरेवान में हुआ था। इसके बाद अभी हाल ही में सर्विया के योविसाद में हुआ था। यहां के ओपन चेलेंज में उन्होंने एलेक्जेंडर हेर्मोलिन्सकी को हराने के मौका मिला। एलेक्जेंडर चेस के “वन ऑफ द लीजेंड” ग्रेंड मास्टर है। चेस को लेकर उन्होंने कई किताबें भी लिख चुके है।
00 जीत का सफर
01 चार बार महाराष्ट्र स्टेट चैंपियन
02 इंडियाना ओपन चैंपियन 2015
03 नेशनल जूनियर चेस चेम्पियन 2019
04 वेस्टर्न एशियन चेस चेम्पियन ब्रॉन्ज मेडल
05 कॉमनवेल्थ गेम्स 2019- ब्रॉन्ज मेडल
06 वर्ल्ड यूथ, वर्ल्ड जीनियस 1st WIM
07 आर्मेनिया ओपन टूर्नामेंट 2021
08 सर्बिया- नोविसाद टूर्नामेंट
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