हिप्पोपोटामस न तो सिगरेट पीता, न शराब पीता, न होटलिंग करता, फिर भी हार्ट अटैक से मौत हो रही..! किस गंभीर खामी पर पर्दा डाल रहा वन विभाग ?

बिलासपुर। कानन पेंडारी में एक मादा हिप्पो पोटामस की फिर मौत हो गई। वन विभाग के अधिकारियों ने इस मौत को भी हार्ट अटैक से हुई मौत बता रहे है। इसके पहले भी एक हिप्पो पोटामस की मौत का कारण भी हार्ट अटैक ही बताया गया था। पशु चिकित्सकों का भी कहना है की वन्यप्राणियों को भी हार्ट अटैक आता है।

कानन पेंडारी में वन्य प्राणियों की मौत अब एक आम बात हो गई है। यहां कभी टाइगर की मौत हो रही है तो कभी गौर की मौत हो रही है, तो कभी नील गाय की मौत हो जाती है। अब लगातार दो-दो मादा हिप्पो पोटामस की मौत हो गई। वन विभाग यहां के वन्य प्राणियों की मौत को वन विभाग कभी गंभीरता से लिया ही नहीं, जब 22 चीतलों की एक साथ मौत हुई थी तब भी गंभीरता से नही लिया गया। वन विभाग के अधिकारी वन्यप्राणियों की मौत के कारण भी अजीब अजीब बताते रहे है। जब 22 चीतल की मौत हुई तो मौत का कारण एंथ्रेक्स बता दिया था। अब हिप्पो की मौत भी प्रथमदृष्टया हार्टअटैक बता रहे है। शनिवार को जो हिप्पो की मौत हुई है वह केवल 4 साल की है मतलब वो पूरी तरह से युवावस्था की दहलीज में है। घासफूस खाने वाले वन्यप्राणी को हार्ट अटैक आना समझ से परे है। अभी तक मनुष्यों के डॉक्टर हार्ट अटैक की मुख्य वजह सिगरेट, शराब का सेवन करना, होटलिंग करना और अनियमित दिनचर्या बताते है। लेकिन वन्यप्राणी कौन सा सिगरेट और शराब का सेवन कर रहे है, यही नहीं होटलिंग से भी कोई नाता नही है। तो सवाल उठना लाजमी है कि हिप्पो को हार्ट अटैक आने का कारण क्या है ? या फिर वन विभाग के अधिकारी अपनी खाल बचाने के लिए हार्ट अटैक को हमेशा के लिए आसान बहाना बना लिए है। हालांकि पशु चिकित्सक मानते है कि पशुओं की मौत भी हार्ट अटैक से होती है। वन्यप्राणियों को भी हार्ट अटैक आता है। लेकिन आम आदमी वन विभाग के कारण को स्वीकार करने के लिए तैयार नही है। लोग तो यही मान रहे है कि वन विभाग के अधिकारी अपनी जान बचाने के लिए हार्ट अटैक बता रहा है जबकि कानन पेंडारी मिनी जु में गंभीर खामी है और यहां वन्य प्राणियों की देखरेख में घोर लापरवाही बरती जा रही है।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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