बिलासपुर। प्रदेश के मुख्यमंत्री भुपेश बघेल अपना चौथा बजट गोबर से बने ब्रीफकेश में लेकर पहुंचे और 1 लाख 12 हजार करोड़ से अधिक का बजट पेश किया। ब्रीफकेश में ‘गोमय वसते लक्ष्मी… लिखा हुआ था। बजट में उन्होंने कई बड़े ऐलान किए।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बुधवार को बतौर वित्तमंत्री चौथा बजट पेश किया।

छत्तीसगढ़ बजट 2022 पेश करने के लिए मुख्यमंत्री बघेल बुधवार गाय के गोबर से बने ब्रिफकेस लेकर विधानसभा पहुंचे है। देश में पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने मां लक्ष्मी के प्रतीक के रुप में गोधन से निर्मित ब्रीफकेस का इस्तेमाल किया है। बता दें कि पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक सशक्तीकरण के क्षेत्र में विशेष कार्य करने वाले सीएम भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ विधानसभा में एक नया इतिहास रच दिया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बजट पेश करने के लिए, जिस बजट बाक्स का उपयोग किया वह चमड़े या जूट का नहीं होकर गोबर के बाई प्रोडक्ट से निर्मित है। मुख्यमंत्री ने बजट के लिए इस्तेमाल किए गए सूटकेस को गोबर के पाउडर से तैयार किया गया है, जिसे महिला स्व-सहायता समूह की नोमिन पाल ने बनाया है। छत्तीसगढ़ देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने मां लक्ष्मी के प्रतीक के रुप में गोधन से निर्मित बजट बाक्स का उपयोग किया है। नगर निगम रायपुर के गोकुल धाम गोठान में काम करने वाली ‘एक पहल’ महिला स्वसहायता समूह की बहनों ने गोबर और अन्य उत्पादों के इस्तेमाल से इस बजट बाक्स का निर्माण किया है और इसी ब्रीफकेस में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बुधवार को विधानसभा में बजट पेश किया है। छत्तीसगढ़ की गोधन न्याय योजना ने पूरे देश में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। पहले किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि गोबर से ब्रीफकेस जैसी कोई सामग्री भी तैयार की जा सकती है। लेकिन गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ की संकल्पना के साथ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गोबर को छत्तीसगढ़ की आर्थिक क्रांति के रूप में प्रस्तुत किया है, जिसकी तारीफ स्वयं प्रधानमंत्री और कृषि मामलों की संसदीय समिति भी कर चुकी है।

00 ब्रीफकेस बनाने में लगे 10 दिन
इस बजट बाक्स की विशेषता यह है कि इसे गोबर पाउडर, चुना पाउडर, मैदा लकड़ी एवं ग्वार गम के मिश्रण को परत दर परत लगाकर 10 दिनों की कड़ी मेहनत से तैयार किया गया है। बजट के लिए विशेष तौर पर तैयार किए गए इस ब्रीफकेस के हैंडल और कार्नर कोंडागांव शहर के समूह द्वारा बस्तर आर्ट कारीगर से तैयार करवाया गया है। छत्तीसगढ़ में ऐसी मान्यता है कि गोबर मां लक्ष्मी का प्रतीक है। छत्तीसगढ़ के तीज त्योहारों में घर-अंगन को गोबर से लीपने की परंपरा रही है। इसी परंपरा से प्रेरणा लेते हुए स्व सहायता समूह की महिलाओं ने गोमय सूटकेस बनाया है, ताकि मुख्यमंत्री के हाथों इस सूटकेस से छत्तीसगढ़ के हर घर में बजट रूपी लक्ष्मी का प्रवेश हो और छत्तीसगढ़ का हर नागरिक आर्थिक रूप से सशक्त हो सके। गोधन न्याय की आर्थिक क्रांति से छत्तीसगढ़ में 10,591 गोठानों की स्वीकृति मिल चुकी है। इनमें से 8,048 गोठानों का निर्माण पूरा हो चुका है। राज्य के 2,800 गौठान स्वावलंबी हो चुके हैं जहां पशुपालक ग्रामीणों से गोबर खरीदी में स्वयं की पूंजी का निवेश करने लगे हैं।
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