SECL की खदान में घुसे भुविस्थापित, तगड़ी सुरक्षा ब्यवस्था के बाद भी नहीं रोक सकी पुलिस, कोयले का उत्पादन ठप्प

कोरबा। रोजगार, मुआवजा और बसाहट की मांग को लेकर बड़ी संख्या में भुविस्थापित कुसमुंडा खदान में घुस गए। आंदोलनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए गए थे लेकिन पुलिस बल उन्हें नहीं रोक सकी। भुविस्थापितों के खदान में घुसने के कारण कोयले का उत्पादन पूरी तरह से ठप्प हो गया।

पिछले कई महीनों से रोजगार, मुआवजा और बसाहट की मांग को लेकर रोजगार एकता संघ के बैनर तले धरना प्रदर्शन सीजीएम दफ्तर के सामने की जा रही है। आंदोलन की अगली कड़ी में पिछले दिनों कुसमुंडा खदान महाबंद का एलान किया गया था। इस एलान के ठीक एक दिन पहले एडीएम की अध्यक्षता में एक बैठक हुई थी और आंदोलन स्थगित कराने में सफलता मिली थी। आंदोलनकारियों ने प्रशासन व एसईसीएल प्रबंधन को 26 मार्च तक का समय निराकरण के लिए दिया था। इसके बाद महाप्रबंधक कार्यालय में एसईसीएल के राजस्व अमला सहित जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम, तहसीलदारों व पटवारियों के द्वारा भूविस्थापितों की ओर से पूर्व में नौकरी हेतु जमा किए गए आवेदनों की स्क्रूटनी की गई। लेकिन इसके बाद मामला कहां तक पहुंचा है, इसकी जानकारी अभी तक नही दिया गया है। लेकिन भू विस्थापितों की मांग अभी तक निराकृत नही किया गया है। यही कारण है कि खदान महाबंद का ऐलान करते हुए जिला प्रशासन को इसकी सूचना 2 दिन पहले दी गई थी। खदान बंदी की चेतावनी को देखते हुए रविवार को कुसमुंडा खदान में तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। भारी संख्या में CRPF के जवानों के अलावा पुलिस बल तैनात किया गया था। लेकिन तगड़ी सुरक्षा ब्यवस्था के बावजूद कई अलग-अलग टुकड़ी में पहुंचे भूविस्थापितों को खदान में घुसने से नहीं रोका जा सका। इससे पहले मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन स्थल पर प्रभावित गांवों के लोग एकत्र हुए। यहां से सभी नारेबाजी करते हुए रैली की शक्ल में कुसमुंडा खदान को बंद कराने के लिए रवाना हुए। इन विस्थापितों को खदान से पहले लगाए गए बैरिकेट्ड पर सीआईएसएफ के जवानों सहित उपस्थित पुलिसकर्मियों के द्वारा रोका गया। लेकिन वहीं पर भूविस्थापितों ने नारेबाजी करते हुए धरना दे दिया। भूविस्थापित खदान की ओर बढ़ने के लिए लगातार प्रयास करते रहे और अलग-अलग टुकड़ी बनाकर अलग अलग क्षेत्रों से खदान में घुस ही गए।इस आंदोलन में खदान से प्रभावित भूविस्थापित व उनके परिवार के सदस्य बड़ी संख्या में खदानबंदी के आंदोलन में शामिल हुए। पार्षद अमरजीत का कहना है कि 125 भूविस्थापितों को एसईसीएल प्रबंधन रोजगार देने में आनाकानी कर रही है। 15 साल से अपना अधिकार पाने के लिए ये लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन आज तक इनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है। इससे नाराजगी है। आगे भले लाठी खानी पड़े या जेल जाना पड़े, लेकिन भूविस्थापितों को उनका अधिकार देकर रहेंगे।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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