बिलासपुर। नव संवत्सर प्रतिपदा तिथि पर छंदशाला का स्थापना दिवस रेशम अनुसंधान केंद्र लखनी देवी मंदिर के पास मेंड्रापारा मे बिलासपुर और रतनपुर के 50 कवियों के साथ संपन्न हुआ ।कार्यक्रम दो सत्र मे संपन्न हुआ। प्रथम सत्र अतिथि परिचय और संगोष्ठी का था जिसके मुख्य अतिथि बुधराम यादव और अध्यक्षता हरबंस शुक्ला, भारतेंदु साहित्य समिति के सचिव विजय तिवारी और छंदशाला की संयोजिका डॉ सुनीता मिश्रा के स्वागत भाषण से आरंभ हुआ। मुख्य अतिथि बुधराम यादव ने छंदशाला के कार्यों की सराहना की और बिलासपुर के साहित्यिक वातावरण की अद्वितीय कडी के रुप मे प्रतिष्ठित किया और छंद रचना मे अनुशासन के महत्व पर प्रकाश डाला।

अध्यक्षता कर रहे हरबंस शुक्ला ने नवरात्रि का महत्व और माता के अपर्णा स्वरूप और नारी शक्ति के सृजन की शक्ति पर प्रकाश डाला। वरिष्ठ कवि विजय तिवारी जी ने छंदशाला मे स्वयं के साथ अन्य रचनाकारों की उत्तरोत्तर प्रगति पर बात की।डॉ .सुनीता मिश्रा ने आपदा काल से आज तक यानि दो वर्षों तक रचनात्मक योगदान देने वाले रचनाकारों के वैशिष्ट्य को निरुपित करते हुए छंदशाला को अनुभूतियों के सृजन की पाठशाला कहा। आपको बता दें कि वैश्विक आपदा काल मे छंदबद्ध रचनाओं को सीखने के उद्देश्य से प्रतिपदा तिथि 24मार्च 2020 को स्थापना की गई थी ।छन्दशाला की स्थापना का श्रेय डॉक्टर सुनीता मिश्रा और आदरणीय विजय तिवारी जी को जाता है, जिन्होंने आपदा को अवसर में बदलने का बीड़ा उठाया। यह समूह 17 रचना धर्मी, सदस्यों से शुरु हुआ और शुरू हुआ सीखने और सिखाने का क्रम। छंद बद्ध रचनाएं, जैसे- दोहा, सोरठा, चौपाई, कुंडलियाँ, गीत, दोहा-गीत, सजल के, मात्रा भार के साथ ही, भाव और लय पर भी काम किया जा रहा है। आज छंद शाला में, चालीस सदस्य है,जो निरंतर अभ्यास में जुटे हुए हैं। कार्यक्रम का द्वितीय सत्र काव्यगोष्ठी का रहा। जिसके मुख्य अतिथि अमृतलाल पाठक और अध्यक्षता रश्मिलता मिश्रा ने की। कार्यक्रम का संचालन द्वय सुषमा पाठक और हरबंस शुक्ला ने किया। कोटा से आई कवयित्री सोमप्रभा तिवारी के मधुर गीत से कार्यक्रम का प्रारंभ हुआ।फिर सजल के कवि मयंक मणि दुबे ने मोहजाल गजदंत सखे ,कब इच्छा का अंत सखे गीत सुनाकर तालियां बटोरी। फिर रतनपुर के कवि राजेंद्र वर्मा ने सत्य की राह माना कठिन है, मगर सत्य की ही डगर चलना चाहिए। महामाया कर दे कृपा जगदंब , प्रमोद कश्यप।बिटिया घर की लाज है, भूत, भविष्य, और आज है। दिनेश पांडेय नूतन वर्ष का नव प्रभात, स्वागत, स्वागत ,स्वागत ।रामेश्वर सांडिल्य ,गांधी तेरे प्रजातंत्र का, हाल है बेहाल। संतोष शर्मा
नव वर्ष की बहुत-बहुत बधाई,यह मधुर बेला आई। शुकदेव कश्यप , विजय तिवारी की श्रीराम वंदना ,विनय पाठक ,सुषमा पाठक के गीत अंतरमन मे आशाओं के जगमग दीप जलाता चल ,रश्मिलता मिश्रा ने मधुर गीत से समां बांध दिया तो सतीश पांडे और सेवकराम ने गजल और अशरफी लाल सोनी के हास्य कविता से लोग लोटपोट होते रहे ।डॉ. सुनीता मिश्रा के गीत जीवन के आपाधापी मे छंदों का सोपान मिले ने खूब तालियां बटोरी और कविता के महत्व को सभी कवियों और श्रोताओं ने अंतस से महसूस किया।
श्री विनय पाठक के आभार प्रदर्शन से कार्यक्रम की समाप्ति हुई।
छंदशाला के स्थापना दिवस कार्यक्रम मे वरिष्ठ कविबुधराम यादव,बसंत पांडेय, विजय तिवारी, रेखराम साहू , मानिकपुरी, रश्मिलता मिश्रा, अमृतलाल पाठक, अशरफी लाल सोनी , सतीश पांडेय , अवधेश अग्रवाल , मयंकमणि दुबे , डॉ. सुनीता मिश्रा ,सुषमा पाठक ,मनीषा भट्ट ,ओमप्रकाश भट्ट , रश्मिलता मिश्रा , सेवकराम , दिनेश पांडे, सोमप्रभा तिवारी, हरबंस शुक्ला, रामेश्वर शांडिल्य, शुकदेव कश्यप ,अच्छे पाठक समेत अन्य श्रोताओं की उपस्थिती रही। कार्यक्रम का सफल संचालन सुषमा पाठक और हरबंस शुक्ला ने किया।
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