भ्रष्टाचार का “एटमॉस्फियर,” सरकारी जमीन में तन गया 2 सौ फ्लैट का टॉवर, राजस्व विभाग के वजूद को बिल्डर की चुनौती

बिलासपुर। बहतराई रोड में सरकारी जमीन पर दो सौ फ्लैट का पूरा टॉवर खड़ा हो गया लेकिन राजस्व विभाग के अधिकारियों को भनक तक नही लगी। दो साल पहले राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कलेक्टर को जांच के आदेश दिए लेकिन क्या हुआ ? कोई बताने के लिए तैयार नहीं है। राजस्व मंत्री खुद भूल गए है कि उन्होंने कोई जांच के आदेश दिए थे ? लेकिन बिल्डर ने राजस्व विभाग के पूरे वजूद को चुनौती दे दिया है।

कहने को तो इस जिले के राजस्व विभाग में ढेरों अधिकारी और कर्मचारी है लेकिन सरकारी जमीन की अफरा-तफरी कोई रोक नहीं पा रहा है। हल्के में पटवारी पदस्थ है, सर्किल में RI है, तहसील में तहसीलदार है, अनुभाग में SDM है और जिले में कलेक्टर पदस्थ है, लेकिन कौड़ी काम के नहीं है। जमीन माफिया और जमीन दलाल को जो करना है वह कर ही लेता है। ये अधिकारी सिक्कों की खनक से उदासीन बने रहते है या रसूख से ये जांच का विषय हो सकता है। ताजा मामला बहतराई रोड में बने एटमॉस्फियर टॉवर का है जहाँ लगभग दो सौ फ्लैट बने है। ये पूरा का पूरा टॉवर सरकारी जमीन में बना है। इस टॉवर को बनने में चार साल से ज्यादा का समय लगा है। स्वाभाविक बात की इसका निर्माण कार्य भाजपा सरकार के समय शुरू हुई और कांग्रेस की सरकार बनी तोगभग 60 प्रतिशत से ज्यादा निर्माण कार्य पूरा हो चुका था। जब इस मामले में राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल से शिकायत हुई तो दो साल पहले छत्तीसगढ़ भवन में पत्रकारों से चर्चा करते हुए मामले की जांच कलेक्टर से करने की जानकारी उन्हीने स्वयं से दी थी। बात आई गई और चली गई, इस मामले में democrecy.in ने जब भी अधिकारियों से पूछताछ की तो उनका रटा रटाया जवाब मिलता रहा कि जांच चल रही है। आखिर में कुछ दिन पहले जब राजस्व मंत्री से इस संबंध में सवाल किया गया तो मंत्री ऐसे चौके जैसे ये बात उनके संज्ञान में पहली बार आया हो। फिर मंन्त्री ने कहा कि सैकड़ों जांच चलती है कितने को याद रखेंगे। इसके बाद बात खत्म हो गई। अब सवाल ये उठ रहा है क्या भू माफिया, जमीन दलाल और बिल्डर ऐसे ही सरकारी जमीन पर निर्माण कर माल बटोरते रहेंगे और मंन्त्री, अधिकारी भूलते रहेंगे ? या फिर भूलने का नाटक कर रहे है ? क्या भूलने के लिए कुछ चढ़ावा मिल गया है ? मिला है तो वो चढ़ावा कितनों में बंटी ? नाम न छापने की शर्त पर विभागीय सूत्रों का कहना है कि बिल्डर को लाभ पहुंचाने के लिए जमीन का तीन बार सीमांकन किया गया है।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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