रिसार्ट का मैनेजर पकवा रहा था चीतल का मांस, 6 गिरफ्तार, चीतल के मांस के लिए चर्चित है रिसॉर्ट

बिलासपुर। जिले के पर्यटन मंडल के रिसार्ट में मैनेजर हिरण का शिकार करके गोस्त पकवा रहा था। वन विभाग की टीम ने रिसार्ट में छापेमारी करके हिरण पका हुआ गोस्त बरामद किया है। मैनेजर समेत 6 कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

मिली जानकारी के अनुसार मामला कोटा क्षेत्र का है। बेलगहना स्थित कुरदर के इको जोहार रिसार्ट में हिरन का गोस्त पक रहा था। इसकी सूचना वन विभाग को शुक्रवार को मिली कि बेलगहना वन परिक्षेत्र के कुरदर स्थित प्राइवेट रिसार्ट में हिरण का शिकार कर उसका मांस को पकाया जा रहा है। सूचना मिलते ही अफसरों ने रिसार्ट में दबिश देकर तलाशी ली तो किचन में कड़ाही पर मांस पक रहा था। प्रारंभिक जांच में पता चला कि जौहर रिसार्ट को पर्यटन मंडल संचालित करता है। जहां 8 से 10 कर्मचारी कार्यरत हैं। यहां मैनेजर और कर्मचारियों के लिए हिरण का मीट बनाया जा रहा था। टीम ने कुक रामकुमार टोप्पो समेत रिसॉर्ट के मैनेजर रजनीश सिंह, रमेश यादव, संजय वर्मा को पकड़ा गया है। उनके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण कानून के उल्लंघन का केस दर्ज किया गया है।
वन विभाग के अफसरों ने मैनेजर रजनीश सिंह के साथ कर्मचारियों से पूछताछ की तब उन्होंने खुद का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता मांस किसका है। उन्होंने पूरा दोष कुक रामकुमार टोप्पो पर मढ़ दिया। जबकि कुक रामकुमार का कहना है कि उसे इस बारे में कुछ जानकारी नहीं है। उसे गांव के जनक बैगा ने पत्ते में मांस लाकर दिया था।
वन विभाग की टीम ने गिरफ्तार आरोपियों का बयान दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। जब्त मांस को जांच के लिए जबलपुर लैब भेजा जाएगा, ताकि पुष्टि हो सके कि यह हिरण का ही मांस है या नहीं। हालांकि वन विभाग की जांच में हिरण के बाकी अवशेषों का कुछ पता नहीं चल सका है। जबकि आसपास के गांव के कुछ लोगों का कहना है कि हिरन का शिकार किया गया है। रिसोर्ट में रुकने वालों को अक्सर हिरन का मांस परोसा जाता है। आसपास के जंगलों का निरीक्षण किया जाए तो हिरन की हड्डियां और अवशेष मिल सकता है। रिसोर्ट हिरन का मांस के लिए ही लोकप्रिय है। वहां रुकने वाले हिरन का मांस खाने के लिए जाते है। क्योंकि मुर्गा – बकरा का मांस तो शहर की किसी भी रेस्टोरेंट में मिल जाता है। लोग मुर्गा – बकरा का मांस खाने तो यहां आएंगे नहीं। कर्मचारियों से यदि कड़ाई से पूछताछ हो तो मामला उजागर हो जाएगा। कोटा-बेलगहना क्षेत्र में इससे पहले भी वन्य जीवों के शिकार हो चुके हैं। जंगल में करंट लगाकर बाघ-तेंदुआ के साथ ही जंगली सुअरों का भी शिकार किया जा रहा है। इस क्षेत्र में कई प्राइवेट रिसार्ट भी हैं, जहां इसी तरह हिरण का शिकार कर मीट बनाया जाता है। लेकिन, वन विभाग के अफसरों ने अब तक प्राइवेट रिसार्ट में छापेमारी नहीं की है।

00 आरोपियों के नाम 1. रामकुमार टोप्पो पिता धनेश्वर टोप्पो, उम्र 39 वर्ष, जाति- उरांव, साकिन- केंवची 2. जनक राम बैगा पिता- अमर सिंह, उम्र 30 वर्ष, जाति- बैगा. साकिन- कुरदर 3. देवसिंह बैगा पित्ता बजरु जाति- बैगा, साकिन- कुरदर 4. राजेश पिता देवसिंह जाति बैगा, साकिन- कुरदर 5. लखन सिंह पिता सुकरु राम उम्र 26 वर्ष, जाति बैगा साकिन-कुरदर 6. रजनीश सिंह पिता स्व. मुक्तेश्वर सिंह, उम्र 32 वर्ष, जाति- राजपुत साकिन महमूदपुर बढेरी जोनपुर थाना बरसठी, तहसील- मढ़याहू, जिला-जौनपुर (उ.प्र.) को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बिलासपुर में प्रस्तुत किया गया जहां से उक्त गिरफ्तार आरोपियों को 14 दिनों की न्यायिक अभिरक्षा में सेंट्रल जेल दाखिल किया गया। संयुक्त कार्यवाही में वन विभाग बेलगहना के परिक्षेत्र सहायक बेलगहना शिवकुमार पैकरा, बी एफ ओ संतकुमार वाकरे, पंकज साहू, सोमप्रकाश जयसिंधु, सावन यादव एवं वन विकास निगम के रेंजर रवि जगत, डिप्टी रेंजर अरविंद बंजारे, नंदकिशोर की विशेष योगदान रहा।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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