बोरे बासी……,
यह बात है अभिमान की
छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान की
छत्तीसगढ़ का सर्वांगीण विकास राज्य के आचार–विचार, खान–पान और रहन–सहन के सामाजिक सांस्कृतिक चिन्हों को समझे बिना संभव नहीं है।
सबका विश्वास और सर्वांगीण विकास के छत्तीसगढ़ माडल को समझने के लिए यहां बसने की नहीं बल्कि रचने की आवश्यकता है।

बोरे बासी को पाक कला शैली के दृष्टिकोण से समझा जाए तो यह एक वाटर राइस है जो खट्टापन लिए होती है । यह ठंडी तासीर की होती है। यह मानव के पाक कला की प्राथमिक विधि में से एक है। जिसे पके चावल में पानी डालकर खमीरीकृत कर बनाया जाता है इसमें आग जलाने की आवश्यकता नहीं होती है। यह छत्तीसगढ़ ही नहीं पूरे मध्य, पूर्वी व दक्षिण भारत में अलग अलग रूप में प्रचलित रहा है परंतु छत्तीसगढ़ ने मानव की इस प्राथमिक पाक शैली को एक विरासत के रूप में आज भी संजो कर रखा है। छत्तीसगढ़ का बोरे बासी वह धरोहर है जो अन्न के दाने दाने के सदुपयोग का संदेश देती है। बोरे बासी की ही तरह ओडिसा में पखाल खाया जाता है जो फरमेंडेड वाटर राइस है ओडिसा के लोगों के द्वारा 20 मार्च को पखाल दिवस मनाया जाता है। दक्षिण भारत में भी वाटर राइस खाया जाता है जिसे नीरागरम कहा जाता है इसे तमिल में पझाया सदम और मलयालम में पझम कांजी कहते हैं। बंगाल में वाटर राइस को पन्ता भात , झारखंड में पानी भात तथा असम में पोइता भात कहते हैं कोंकण व मालवन क्षेत्र में चावल का पेज बनाया जाता है जो राइस सूप की तरह होता है । देश के अलग अलग क्षेत्र में वाटर राइस का अलग अलग स्वरूप है परंतु छत्तीसगढ़ में वाटर राइस के सभी स्वरूपों का अद्भुत संयोजन है। छत्तीसगढ़ में बोरे बासी के रूप में वाटर राइस के असली स्वरूप के साथ साथ इसके कई प्रकार भी हैं
जैसे “बासी भात” इसका क्लासिकल स्वरूप है तो “बोरे भात” इसका इंस्टेट वर्जन है । छत्तीसगढ़ में इसका गर्म सूप वर्जन “पेज भात” है जिसे बिना माढ़ (पसिया) निकाले गीले द्रव्य रूप में बनाया जाता है यह छत्तीसगढ़ के पूर्वी अंचल में अधिक चलन में है । बस्तर अंचल में वाटर राइस की तरह मंडिया पेज बनाया जाता है जो रागी (मंडिया) और चावल को एक निश्चित अनुपात में मिलाकर बनाया जाता है यह एक पेय या शरबत वर्जन है इसे मल्टिग्रेन वर्जन भी कह सकते हैं , मंडियापेज को मिट्टी के बर्तन में रखकर अगले दिन भी उपयोग किया जाता है यह पौष्टिकता से भरपूर एक एनर्जी ड्रिंक है.
अब आहार विज्ञानी चावल को फोर्टीफाइड बनाकर खाने की सलाह दे रहे हैं फोर्टिफिकेशन के लिए बड़े बड़े प्लांट स्थापित किए जा रहे है। मिनरल्स व विटामिन चावल में कृत्रिम रूप में मिलाकर पौष्टिक बनाए जा रहे हैं जिसमे बहुत अधिक खर्च भी हो रहा है परंतु यह बात बहुत महत्वपूर्ण है कि बोरे बासी एक प्रकार से चावल का प्राकृतिक फोर्टिफिकेशन करती है। वह भी बिना किसी खर्च के।
छत्तीसगढ़ का बोरे बासी सुपर फूड है , जो यहां के बहुसंख्यक जनता का प्रतिदिन का भोजन है यह सुबह का नाश्ता है दोपहर का खाना है और ढलते पहर का दुसरावन है । छत्तीसगढ़ के बोरेबासी में अन्न बचाने का संदेश भी है। रात के भोजन पश्चात शेष बचे पके चावल को खराब होने से बचाने के लिए और चावल के एक एक दाने का सदुपयोग करने के उद्देश्य से उसे पानी में डुबाकर रख दिया जाता है जो सवेरे तक ’बासी भात’ बन जाता है यहां बासी भात का अर्थ बासी हो चुके भात से नहीं बल्कि एक स्वादिष्ट और पौष्टिक व्यंजन “बासी भात” से है । रात भर पानी में डूबे रहने के कारण यह खमीरीकृत हो जाता है जिससे इसमें विटामिन, खनिज तत्व, प्रोटीन, कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाती जबकि वसा और कार्बोहाइड्रेड की मात्रा कम हो जाती है। यह गर्मी के दिनों में बहुत उपयोगी होता है ब्लड प्रेशर हाइपर टेंशन से बचाता है, त्वचा के लिए अच्छा होता है , वजन कम करने में सहायक होता है , सुपाच्य होता है जिससे कब्ज दूर होती है, शरीर में पानी की आवश्यकता की पूर्ति करता है। यह एक हल्का भोजन है इसमें अनेक औषधीय गुण होते हैं।
बासीभात का चलन पहले की अपेक्षा कम हुआ है जो संस्कृतिकरण का परिणाम है लेकिन आज भी छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचल में इसका उपयोग बहुतायत में किया जाता है । यह छत्तीसगढ़ के लोगों का असली खाना है।
खेत में काम करते हुए मजदूर हों या कारखानों के दिहाड़ी मजदूर या काम की तलाश में भटकते रेलवे प्लेटफार्म पर बैठे मजदूर , यहां के मजदूरों की बंद पोटली जब खाने के लिए खुलती है तो उसमे से प्रायः बासी भात ही निकलता है। आज भी राज्य की 80% जनता का यह मुख्य आहार है ऐसा कहना कोई अतिसंयोक्ति नहीं है। प्रदेश के मुखिया ने राज्य की प्रमुख आहार की अस्मिता का आज गौरव गान किया है, आज एक आह्वान पर बोरे बासी के सम्मान में, कृषक मजदूर के स्वाभिमान के लिए अमीर गरीब , छोटे बड़े सभी एक पंगत में बैठे नजर आ रहे हैं । यह एक समतामूलक समाजवादी संदेश है जो छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के वास्तविक परिकल्पना को साकार करता है ।
जय छत्तीसगढ़
(कौशल साहू के फेसबुक वॉल से)
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