मोपका में बिक गई 4 एकड़ पट्टे की जमीन, डायवर्सन शाखा की भूमिका संदिग्ध, क्या कर रहे थे पटवारी, तहसीलदार और तब के SDM

बिलासपुर। मोपका में एक बार फिर से जमीन का बड़ा खेल हो गया है। लगभग 4 एकड़ पट्टे की कृषिभूमि को डायवर्सन करके बेच दिया गया है। इस मामले में डायवर्सन शाखा की भूमिका संदिग्ध है। हालांकि शिकायत पर कलेक्टर ने जांच बिठा दी है लेकिन इस जांच को भी अधिकारी “एटमॉस्फियर” टॉवर की जांच की तरह भूल न जाए। सवाल ये उठ रहा है जब पट्टे की जमीन बिक रही थी तो हल्के का पटवारी, नायब तहसीलदार, तहसीलदार और तब के SDM क्या कर कर रहे थे ?

अधिवक्ता प्रकाश सिंह ने मोपका के पटवारी हल्का नम्बर 29 के पट्टे की जमीन को लेकर कलेक्टर से शिकायत की है। शिकायत में बताया है कि खसरा नम्बर 992/9 की जमीन शासन ने अहस्तांतरित पट्टा के रूप में दिया है। बावजूद इसके नियमों से छेड़छाड़ कर पट्टेदार ने कृषि भूमि का डायवर्सन करा लिया है, जो राजस्व नियमों के खिलाफ है। पट्टेदार ने डायवर्सन के लिए कलेक्टर से अनुमति भी नही लिया है। यही नही पट्टेदार ने बैंक ऋण लेने के लिए कमिश्नर कार्यालय से दस्तावेजों से अहस्तांरित शब्द भी हटवा लिया है। शिकायत में बताया गया है कि विमला ने चार एकड़ जमीन 6 टुकड़ों में बेचा है, पूरी प्रक्रिया में ना केवल राजस्व नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया गया है, केन्द्र और राज्य शासन को लाखों रूपयों के राजस्व की क्षति पहुंचाई है। शिकायत कर्ता के अनुसार शासकीय पट्टे की जमीन का मद परिवर्तन बिना कलेक्टर के अनुमति लिए संभव नही है। पट्टे से अहस्तांतरण शब्द को भी नहीं हटाया जा सकता है। बावजूद इसके पहले कृषि जमीन को डायवर्टेड किया गया, इसके बाद नियम विरूद्ध अहस्तांतरित शब्द को भी हटाया गया। शिकायत में जिक्र है कि विमला ने चार एकड़ पट्टा की जमीन को बिना कलेक्टर अनुमति मद परिवर्तन किया। इसके बाद जमीन को कृषि योग्य बताकर डायवर्टेड कर 6 टुकड़ों में बेच दिया गया है। यह जानते हुए भी कि कृषि जमीन पर रजिस्ट्री शुल्क बहुत कम होता है। इस तरह से शाशन को लाखों रूपयों का नुकसान हुआ है। इस पूरे मामले में डायवर्सन शाखा की भूमिका संदिग्ध हो गई है। जबकि तात्कालीन तहसीलदार ने उसी तारीख को अन्य अलग अलग जमीनों का नामांतरण किया। लेकिन खसरा नम्बर 992/9 का नामांतरण नहीं किया। ना ही नामांतरण पंजी पर किसी प्रकार का सील सिक्का लगा है। हस्ताक्षर तो है लेकिन किसने किया इसकी जानकारी किसी को नहीं है। जाहिर सी बात है कि नामांतरण के समय डायवर्सन शाखा के अधिकारी और पटवारियों ने जमीन माफियों के साथ मिलकर कूटरचना को अंजाम दिया है। दस्तावेज के अनुसार रजिस्ट्री के समय जमीन को कृषि योग्य बताया गया है। जबकि नामांतरण पंजी में जमीन डायवर्टेड है और दोनों दस्तावेंजों में एक ही हस्ताक्षर है। इससे स्पष्ट है कि डायवर्सन शाखा का कोई अधिकारी इस पूरे खेल में शामिल है।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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