जंगल सफारी में बंद पंगोलिन को छोड़ने की गुहार वन मंत्री से, दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही की मांग

रायपुर। बस्तर के उमरकोट-जगदलपुर मार्ग पर ओडिश सीमा से 25 अप्रैल 2022 को एक जीवित पैंगोलिन, जिसे बेचने के उद्देश्य से परिवहन किया जा रहा था, जप्त कर रायपुर लाकर जंगल सफारी में रखने के मामले में आज वन मंत्री मो. अकबर से पैंगोलिन को वापस वन में छोड़ने की मांग की गई।

रायपुर के नितिन सिंघवी द्वारा वन मंत्री को प्रेषित पत्र में बताया गया कि पंगोलिन वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की धारा 11 के तहत अनुसूची-1 के तहत संगक्षित वन्यजीव है, आई.सी.यू.एन. की रेड बुक में भारतीय पैंगोलिन संकटग्रस्त घोषित किया गया है। उसे बंधक बनाना या मारने का निर्णय लेने के लिए सिर्फ मुख्य वन्यजीव संरक्षक ही निर्णय ले सकते हैं। कानून की यह जानकरी वन परीक्षेत्र अधिकारी करपावंद, जिला बस्तर को होने के बावजूद उन्होंने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जगदलपुर को आवेदन देकर कहा की जप्त वन्य प्राणी पैंगोलिन दुर्लभ प्रजाति का वन्य प्राणी है, इसे जंगल में छोड़ने पर ग्रामीणों के द्वारा हानि पहुंचाई जा सकती है, सुरक्षा की दृष्टि से शासन द्वारा वर्तमान में निर्मित जंगल सफारी नया रायपुर में रखना उचित होगा।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जगदलपुर द्वारा वन परीक्षेत्र अधिकारी के आवेदन पर ही आदेशित किया गया कि प्रकरण में जब्त शुदा वन्यजीव पैंगोलिन को वनमंडल अधिकारी जगदलपुर के माध्यम से जंगल सफारी नया रायपुर में विधि अनुसार रखे जाने की आदेशित किया जाता है।

00 प्रदेश के सभी पंगोलिन जंगल सफारी में पाए जायेंगे

प्रेषित पत्र में बताया गया कि वन परिक्षेत्र अधिकारी द्वारा की गई कार्यवाही पूर्णता विधि विरुद्ध तथा वन्य प्राणियों के विरुद्ध है। अगर प्रदेश के सभी वन परिक्षेत्र अधिकारी ऐसा करने लगे तो वह दिन दूर नहीं जब हमारे प्रदेश के अनुसूची-1 के सभी जानवर जंगल सफारी में पाए जाएंगे।

00 मुख्य वन्यजीव संरक्षक के संरक्षण तले जानकारी में हुआ सब कुछ, नहीं छोड़ रहे पेंगुलिन को

पैंगोलिन को जंगल सफारी रायपुर में रखे जाने की जानकारी और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के द्वारा विधि अनुसार रखे जाने के आदेश की जानकारी, मुख्य वन्यजीव संरक्षक को है। इसके बाद भी मुख्य वन्यजीव संरक्षक, जिन्हें संपूर्ण अधिकार प्राप्त है उन्होंने अभी तक कोई भी विधि अनुसार कार्यवाही नहीं की है न ही पैंगोलिन को वापस जंगल में छोड़े जाने हेतु आदेशित किया है।

00 पूरे घटना क्रम में वनमंडल अधिकारी जगदलपुर मौन रहे

वनमंडल अधिकारी जगदलपुर की जानकारी में भी यह तथ्य है कि न्यायालय ने पैंगोलिन को उन के माध्यम से जंगल सफारी भेजने हेतु आदेशित किया था परंतु उन्होंने कोई कार्यवाही नहीं की तथा मौन रहकर वन परीक्षेत्र अधिकारी करपावंद को मन मर्जी करने दी।

00 क्या मांग की गई

वन मंत्री से मांग की गई कि वन परीक्षेत्र अधिकारी के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई करते हुए प्रकरण में मुख्य वन्यजीव संरक्षक तथा वनमंडल अधिकारी जगदलपुर के विरुद्ध पूरी जांच करवाएं तथा सबसे पहले मुख्य वन्यजीव संरक्षक को विधि अनुसार कार्यवाही करते हुए पंगोलिन को वापस उचित वन में छोड़ने हेतु आदेशित करें।

Author Profile

नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *