बिलासपुर। चिल्हाटी में 5 करोड़ की सरकारी जमीन बेचने के मामले में एक धमाकेदार ऑडियो वायरल हो रहा है। इस कथित ऑडियो में आवाज जमीन दलाल और तात्कालिक मोपका पटवारी की बताई जा रही है। इस ऑडियो में तात्कालिक तहसीदार नारायण गेबल द्वारा 20 लाख रुपए लेने के बाद भी नामांतरण नहीं करने की बात कही जा रही है। पैसा किसी बलदाऊ के हाथ छोड़ने की बात ऑडियो में कही जा रही है। इस पूरे लेनदेन में जेठू नामक किसी जमीन दलाल का नाम भी सामने आ रहा है। ऑडियो में पटवारी खुलेआम स्वीकार कर रहा है कि शासकीय जमीन को आनलाइन डीएससी करने के लिए अपने हिस्से की राशि ली है। मेरे जैसा पटवारी नहीं है, क्योंकि मेरे काम और दाम में भरोसा है, मैं सीधे पैसा लेता हूं और काम करके देता हूं। मैं रेट तय करने के लिए समय नही लगता हूं। पटवारी जमीन दलाल से यह भी कह रहा है की मैं मोपका में था तो आपका काम उधारी में भी करता था। बकायदा डायरी मेंटेन करते थे पूरा पैसा अभिनव रखता था। ऑडियो में 20 लाख लेकर सरकारी जमीन की सीमांकन करने की बात भी सामने आई है। जिसमें एक RI का नाम सामने आ रहा है।
गौरतलब है की चिल्हाटी की पांच एकड़ शासकीय जमीन को निजी व्यक्ति के नाम पर चढ़ाते हुए इसे तीन लोगों को चार करोड़ रुपए में बेच दिया गया है। इसके लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए है। दरअसल चिल्हाटी में खसरा नंबर 317/8 है जो शासकीय जमीन है। निस्तार पत्रक में भी यह जमीन दर्ज है। जमीन दलालों ने पटवारी, आरआई के साथ मिलकर इसके फर्जी दस्तावेज तैयार किए और इसे बलदाउ सिंह के नाम पर दर्ज करा दिया। बाद में बलदाउ ने इस पांच एकड़ जमीन को तीन लोगों को बेचा। इसमें से जयराम नगर निवासी उत्तम कुमार को ढाई एकड़, बुधवारी बाजार बिलासपुर निवासी विपुल सुभाष नागोसे को एक एकड़ 99 डिसमिल और जांजगीर के कुमार दास मानिकपुरी को 51 डिसमिल जमीन बेची गई।
जानकारी के मुताबिक इस शासकीय जमीन के लिए करीब 5 करोड़ रुपए में पूरी डील हुई थी। इसमें से 4 करोड़ रुपए में जमीन की रजिस्ट्री हुई तो बाकी एक करोड़ रुपर पटवारी से लेकर तहसीलदार को चढ़ावा दिया गया। हालांकि बाद में हंगामा मचने पर तत्कालीन तहसीलदार नारायण गघेल ने नामांतरण रोक दिया। मूल रिकार्ड का अवलोकन करने पर पाया गया कि पूरी जमीन निस्तार पत्रक में दर्ज है। इसके बाद तहसीलदार रमेश मोर ने जमीन मालिक बलदाउ सिंह से सभी दस्तावेज जमा करने और इसकी जानकारी मांगी को आखिर यह जमीन उसके नाम पर कैसे चढ़ी। लेकिन वह इसकी जानकारी और दस्तावेज पेश नहीं कर सका। इसके बाद तहसीलदार ने नामांतरण का आवेदन खारिज कर दिया है। जमीन रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए पटवारी प्रतिवेदन मांगा गया तो पटवारी ने लिखकर दिया कि यह जमीन बलदाऊ सिंह के नाम पर दर्ज है। साथ ही इसे आनलाइन चढ़ा दिया गया। बाद में आरआई ने सीमांकन किया और सबकुछ सही होने का रिपेर्ट पेश कर दिया। हालांकि तहसीलदार को जांच में गड़बड़ी का खुलासा हुआ तो नामांतरण नहीं किया। अब उस पटवारी और एक जमीन दलाल का आडियो वायरल हो रहा है।
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