उद्योग की जमीन बेचकर भागा वसुंधरा पॉवर प्लांट का मालिक, नौकरी का सपना देखते रह गए गांव के किसान, संदेह के दायरे में राजस्व विभाग

बिलासपुर। भदौरा जमीन घोटाला के बाद मस्तूरी क्षेत्र में एक बार फिर से बड़ा जमीन घोटाला सामने आ रहा है। वसुंधरा पॉवर प्लांट के लिए क्षेत्र के तीन गांवों में किसानों से कौड़ियों के दाम पर जमीन खरीदी गई लेकिन अब 15 साल बाद उसी जमीन को 15 गुना अधिक कीमत में एक दूसरी कंपनी को बेच दी। इन 15 सालों में वसुंधरा पॉवर प्लांट के संचालकों के उद्योग लगाने के नाम पर एक ढेला तक नहीं रखा। अब किसान अपनी जमीन वापस मांग रहे है।

वसुंधरा स्टील एंड पावर प्लांट के संचालकों ने किसानों और राज्य सरकार के साथ धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है। कंपनी ने स्टील और पॉवर प्लांट लगाने के लिए पाराघाट, भनेशर और बेलटुकरी में किसानों से जमीन ली और 12 साल बाद उसे राशि पॉवर प्लांट को बेच दिया। गांव के किसानों का कहना है की कंपनी ने उनसे 70 से 80 हजार रुपए एकड़ में जमीन खरीदी और आज 20 लाख रुपए एकड़ के हिसाब से उसे बेच दिया। कंपनी ने 12_15 साल में प्लांट लगाने के नाम पर एक ढेला तक नहीं रखा। किसानों कहना है की उनसे जमीन उद्योग स्थापित करने के लिए ली गई थी जब उद्योग नहीं लग रहा है तो जमीन उन्हें वापस करना चाहिए। किसान चाहते है की जिस तरह बस्तर जिले के लोहंडीगुड़ा विकास खण्ड में टाटास्टील प्लांट के जमीन की रजिस्ट्री शून्यकर किसानो को जमीन वापस दिलाई गई उसी तरह हमारी जमीन भी हमे वापस दिलाऐं। गौरतलब है की पाराघाट, भनेशर, बेलटुकरी के किसानो की जमीन वसुंधरा स्टील एण्ड पावर लिमिटेड द्वारा जमीन खरीदी गई थी। इसके बाद पर्यावरण विभाग द्वारा 5 मार्च 2010 को जनसुनवाई कराया गया था। लोक सुनवाई के मात्र 2 किसानों ने उद्योग लगाने का विरोध किया था। शेष सभी कृषकों ने उद्योग लगाने के नाम पर सहमति दी थी। कंपनी ने किसानों से कौड़ियों के दाम पर जमीन खरीदी थी। जन सुनवाई के दौरान कंपनी के प्रबंधक सुशिल कुमार जलान ने राज्य औद्योगिक निति अंतर्गत मिलने वाले सभी लाभ, मुआवजा, स्थानापन, पुनर्वास एवं प्रत्येक परिवार के सदस्य को नौकरी लगाने का आश्वासन दिया था। कंपनी प्रबंधक ने राज्य शासन एवं किसानो को भी धोखे में रखकर कृषको से खरीदी गयी जमीन को गुपचुप तरिके से राशि स्टील एण्ड पावर लिमिटेड को बेच दी। जमीन की खरीदी_बिक्री करने के पहले न तो ईश्तहार छपाया गया और न ही ग्राम में मुनियादी कराई गई। प्रभावित कृषको से कोई राय मशविरा भी नही किया गया।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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