बिलासपुर। आदिवासी विकास विभाग में काम कर रहे चतुर्थ वर्ग कर्मचारियों को नियमित करने की मांग को लेकर कर्मचारी संघ ने सहायक आयुक्त कार्यालय का घेराव किया गया। संघ का आरोप है कि विभाग के हॉस्टलों में रसोईया, चौकीदार और जलवाहक जैसे पदों पर कर्मचारी सालों से कलेक्टर दर पर काम कर रहे है। लेकिन उनकी नियमितिकरण की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ लघु वेतन शासकीय चतुर्थ वर्ग कर्मचारी ने सोमवार को आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त कार्यालय का घेराव किया। संघ की मांग है कि जिले के अलग अलग छात्रावासों ने सैकड़ों कर्मचारी रसोईया, चौकीदार और चपरासी के पद पर काम कर रहे है। इन कर्मचारियों को कलेक्टर दर पर वेतन दिया जा रहा है। सालों से काम कर रहे इन कर्मचारियों को नियमित करने के नाम पर केवल आश्वासन ही दिया जा रहा है। जबकि शासन से कर्मचारियों को नियमित करने के आदेश दिए जा चुके है। संघ के प्रांताध्यक्ष बिंदेश्वर राम रौतिया ने बताया कि प्रदेश के 11 जिलों में कलेक्टर दर पर काम करने वाले कर्मचारियों को नियमित किया जा चुका है। पेंड्रा गौरेला मरवाही जिले में भी नियमित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। लेकिन बिलासपुर के सहायक आयुक्त द्वारा नियमितिकरण को लेकर टालमटोल किया जा रहा है। गौरतलब है कि जिले में इस कर्मचारियों की संख्या 80 के आसपास है। इसके अलावा विभाग में मौखिक आदेश पर काम करने वालों की संख्या दो सौ से भी ज्यादा है। जिले में जितने भी अधिकारियों को पोस्टिंग हुई सभी ने अपने_अपने हिसाब रेवड़ी की तरह नियुक्तियां बांटी।
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