बिलासपुर। सत्या पॉवर की जनसुनवाई को लेकर ग्रामीण लामबंद होने लगे है। प्लांट के विस्तार के विरोध में गांव_गांव में बैठकें हो रही है। जन सुनवाई में ग्रामीण विरोध को लेकर रणनीति बना रहे है। ग्रामीण किसी हाल में क्षेत्र को प्रदूषित होने से बचाना चाह रहे है।

कछार, सेंदरी, गतौरी, लोफदी, चुनकवा, नवागांव, निरतु समेत दर्जनभर गांव के लोगों को पता चला है की सत्या पॉवर प्लांट का विस्तार होने वाला है उसके बाद से ग्रामीणों में बेचैनी बढ़ गई है। ग्रामीण अपने अलावा परिवार के लोगों की चिंता सताने लगी है। ग्रामीण इस बात को लेकर ज्यादा चिंतित है की पहले से प्रदूषित हो चुके क्षेत्र को और ज्यादा प्रदूषित होने से कैसे बचाया जाए। इसको लेकर गांव_गांव में बैठकें हो रही है। ग्रामीण अपना खेत, खलिहान, बाड़ी को बचाने के लिए रणनीति बना रहे है। ग्राम सभा करके प्लांट के विस्तारीकरण के विरोध में प्रस्ताव पास किया जा रहा है। इसके अलावा जनसुनवाई में प्लांट के विस्तार का विरोध करने का संकल्प ले रहे है। गौरतलब है की क्षेत्रीय पर्यावरण विभाग ने प्लांट के विस्तारीकरण के लिए 7 जुलाई 2022 को जन सुनवाई रखा है। जन सुनवाई गतोरी प्राथमिक-माध्यमिक शाला मैदान में दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। कम्पनी ने अपनी वर्तमान उद्योग की विभिन्न ईकाईयों के विस्तार के लिए पर्यावरण संरक्षण मण्डल रायपुर में आवेदन किया है। स्वीकृति के पूर्व आम जनता का अभिमत जानने के लिए लोक सुनवाई का आयोजन किया गया है। जन सुनवाई के पहले ही आस पास के ग्रामीण लामबंद होने लगे है। पहले से ही प्रदूषण और अव्यवस्था झेल रहे ग्रामीण प्लांट का विस्तार नहीं चाहते।

ग्रामीणों की माने तो कंपनी पहले की शर्तो का पालन नही कर रही है तो विस्तार किस बात की, कंपनी प्रबंधन ने शर्तों के अनुसार न तो प्लांटेशन किया है और न ही प्लांट से उड़ने वाली डस्ट को रोक पाई है। आसपास के लोगो को रोजगार भी नहीं मिल रहा है। ग्रामीणों के हिस्से में केवल राखड़ और कोयले की डस्ट ही आ रही है। कंपनी पिछले 10 _ 12 साल में CSR मद से प्रभावित ग्रामीणों को कोई सुविधा नहीं दे पाई है। सत्या पॉवर के कारण सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि खराब हो चुकी है। जो किसान पहले सैकड़ों एकड़ जमीन में सब्जी की फसल लेते थे आज पूरी तरह से बंद कर चुके है। यही नहीं प्लांट के आसपास बसे कछार, सेंदरी, गतौरी, लोफदी, चुनकवा, नवागांव, निरतु समेत दर्जनभर गांव के लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। लोगों के घरों में काला डस्ट उड़कर घरों को बर्बाद कर रहा है। डस्ट और राखड़ से दमा की बीमारी फैल रही है। अब प्लांट के विस्तार के बाद आसपास के पूरे क्षेत्र में पहले की तुलना में दुगना प्रदूषण होने वाली है।

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