बिलासपुर। सत्या पॉवर प्लांट के विस्तार को लेकर जनसुनवाई 7 जुलाई को है लेकिन उसके पहले ही ग्रामीण अपना आपा खो रहे है। जनसुनवाई को लेकर गतौरी में लगे टेंट को आज ग्रामीणों ने उखाड़ के दिया है। इस बीच क्षेत्र का एक कांग्रेसी नेता भी सक्रिय हो गया है। ग्रामीण उसकी भूमिका को संदेह के नजर से देख रहे है। ग्रामीणों का संदेह है की ये कांग्रेस नेता कहीं उद्योपति का एजेंट बनकर तो सक्रिय नहीं हुआ है।
बिल्हा तहसील के ग्राम गतोरी एवं सेन्दरी में स्थापित मेसर्स सत्या पॉवर एण्ड इस्पात लिमिटेड को पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए 7 जुलाई 2022 को लोक सुनवाई का आयोजन किया गया है। ये लोक सुनवाई गतोरी प्राथमिक-माध्यमिक शाला मैदान में दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। कम्पनी ने अपनी वर्तमान उद्योग की विभिन्न ईकाईयों के विस्तार के लिए पर्यावरण संरक्षण मण्डल में आवेदन किया है। स्वीकृति के पूर्व आम जनता का अभिमत जानने के लिए गतोरी में जिला प्रशासन द्वारा लोक सुनवाई का आयोजन किया गया है। गतौरी समेत आस पास के गांव में सत्या पावर प्लान्ट के विस्तार को लेकर जबरदस्त आक्रोश है। जब से जन सुनवाई की सूचना ग्रामीणों को हुई है तब से गांव_गांव में बैठके हो रही है। ग्रामीण पॉवर प्लांट के विस्तार के विरोध में लामबंद हो रहे है। ग्रामीणों के आक्रोश को इस बात से समझा जा सकता है की जनसुनवाई के 3 दिन पहले गतौरी के स्कूल में लग रहे टेंट को उखाड़ के फेंक दिया गया है। इस बीच क्षेत्र में एक कांग्रेसी नेता सक्रिय हो गया है। गांव_गांव में जाकर वह मीटिंग ले रहा है और ग्रामीणों की नब्ज टटोल रहा है। कांग्रेस नेता के सक्रिय होने को लेकर ग्रामीण संदेह की नजर से देख रहे है। ग्रामीणों को संदेह है की कहीं वो उद्योगपति के एजेंट बनकर तो सक्रिय नहीं हुआ है? ग्रामीणों का दो टूक शब्दों में कहना है की कथित कांग्रेस नेता इसके पहले कभी ग्रामीणों की समस्या को लेकर सक्रिय नहीं हुआ। ग्रामीण प्लांट से निकलने वाले धूल, धुंए, राखड़ से कई साल से परेशान है। सैकड़ों एकड़ जमीन खराब हो गई। प्लांट के भारी वाहन गांव की सड़क को बर्बाद कर दिया लेकिन कभी आवाज नही उठाया। लेकिन अब वह अचानक सक्रिय हो गया है।
प्लान्ट के विरोध में ग्रामीणों की अगुवाई कर रहे दिलीप अग्रवाल का कहना है कि ग्रामीण नहीं चाहते हैं कि गतौरी स्थित पावर प्लान्ट का विस्तार किया जाए। प्लान्ट प्रबमधन ने हमेशा ग्रामीणों के साथ भद्दा मजाक किया है। एक दशक पहले हुई भूल का खामियाजा ग्रामीण अभी तक भुगत रहे हैं। प्लान्ट के विस्तार का हर संभव विरोध किया जाएगा।
मामले में गतौरी सरपंच अश्वनी सोनवानी ने कहा कि यह सच है कि ग्रामीणों ने टैन्ट को उखाड़ दिया है। उस समय वह गांव में नहीं था। यदि ग्रामीण प्लान्ट का विस्तार नहीं चाहते हैं तो हम उनके साथ हैं।
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