बिलासपुर। सत्या पॉवर के विस्तारीकरण को लेकर गतौरी के स्कूल में जनसुनवाई का आयोजन किया गया। इस जनसुनवाई में किसान, समाजसेवी और आम जनता ने तो विस्तारीकरण का विरोध किया, लेकिन गांवों के सरपंच, जनपद और जिला पंचायत के सदस्यों ने विरोध नहीं किया लेकिन नियम_कानून का पालन करने की नसीहत जरूर दी और कहा की पर्यावरण के नियमों का पालन होना चाहिए। किसी भी जनप्रतिनिधि ने नही पूछा की 15 साल से चल रहे उद्योग के संचालकों ने कितना नियमों का पालन किया है। मतलब साफ है की जनप्रतिनिधियों को जनता की समस्या से कोई सरोकार नहीं है।

गतौरी के स्कूल में आयोजित जन सुनवाई में संभावित विरोध को देखते हुए पुलिस बल भारी व्यवस्था की गई थी। एक समय तो ऐसा भी था की सुनवाई में पहुंची जनता से ज्यादा पुलिस बल के जवान नजर आ रहे थे। पुलिस के बड़े अधिकारी भी मौके पर पहुंचकर लगातार जायजा लेते रहे। इस बीच समाजसेवी राधेश्याम शर्मा ने अपनी बात बेबाकी के साथ रखा और कहा की ये जनसुनवाई फर्जी है, लोगों को धोखा देने के लिए किया जा रहा है। प्रभावित ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों के अध्ययन के लिए AIA रिपोर्ट नही रखा गया है। जब रिपोर्ट ही नही रखा गया है लोगो को कैसे पता चलेगा की उद्योग के विस्तार से कितना लाभ है और कितना नुकसान है। उद्योग से कितना प्रदूषण फैलेगा इसकी जानकारी ही नही रखा गया तो जनसुनवाई में ग्रामीण अपनी बात कैसे रखेंगे। जिला प्रशासन और पर्यावरण विभाग ने ग्रामीणों को उनके संवैधानिक अधिकार से वंचित किया गया है। इसलिए जनसुनवाई में उपस्थित सभी अधिकारियों के खिलाफ 420 का मामला दर्ज होना चाहिए। इस जनसुनवाई का शुरू से विरोध कर रहे दिलीप अग्रवाल ने कहा की सत्या पॉवर प्लांट की स्थापना शुरू से ही गलत जगह में किया गया है। जिस जगह पर उद्योग स्थापित किया गया है वह उद्योग के लिए आरक्षित जमीन नहीं है। पूरी तरह से कृषि भूमि में स्थापित किया गया है। सैकड़ों एकड़ कृषिभुमि बर्बाद हो चुकी है, दर्जनभर गांव के लोग प्रदूषण से परेशान है। अब इसकी विस्तार से प्रभावित गांवों की स्थिति क्या होई इसकी कल्पना की जा सकती है। उन्होंने कहा की किसी भी स्थिति में उद्योग का विस्तार करना उचित नहीं है। जनसुनवाई में किसान सुरेंद्र कश्यप ने कहा की इस उद्योग को लगे 15 साल हो गए है। प्लांट के ठीक पीछे मेरी कृषि भूमि है। हर साल मेरा फसल खराब होता है, जो फसल होता है उसका बाजार में रेट नहीं मिलता क्योंकि उसमे प्लांट का निकला डस्ट जमा रहता है। आज तक मुझे कंपनी की ओर से कभी मुआवजा नहीं दिया गया। जबकि हर स्तर पर शिकायत कर चुका हूं। उन्होंने कहा इस प्लांट का विस्तार तो दूर इसको यहां से हटाकर इंडस्ट्रियल एरिया में शिफ्ट करना चाहिए। इस तरह जनसुनवाई में पहुंचे प्रभावित गांवों के सभी ग्रामीणों ने प्लांट के विस्तारीकरण का विरोध किया लेकिन जनप्रतिनिधियों के सुर बदले हुए थे। प्रभावित गांवों के ज्यादातर सरपंच, कांग्रेस नेता त्रिलोक श्रीवास, छाया विधायक राजेंद्र साहू, अंकित गौरहा समेत जनपद सदस्य, जिला पंचायत सदस्यों ने प्लांट के विस्तारीकरण का सीधे तौर पर विरोध तो नही किया। लेकिन सभी ने पर्यावरण का ख्याल रखने, सामाजिक दायित्व का निर्वाह करने, स्थानीय लोगों को रोजगार देने जैसी मांग रखा।

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