बिलासपुर। प्रदेश सरकार के खिलाफ युवाओं की समस्या को लेकर किए गए धरना_प्रदर्शन के दौरान जमकर बवाल हुआ। प्रदर्शन युवा मोर्चा का था लेकिन मंच पर वरिष्ठ नेताओं का कब्जा था। युवा मोर्चा के कई लोगों को बोलने का अवसर भी नही मिला जिससे कई लोग नाराज थे। जब ज्ञापन सौंपने कलेक्ट्रेट जा रहे थे तब दुर्गेश पांडे और रामदेव कुमावत का झगड़ा हो गया। प्रत्यक्षदर्शियो की माने तो दुर्गेश ने रामदेव को तीन झापड़ मार दिया और चौथा मरने वाला था तभी एक भाजपा के कार्यकर्ता ने बीच बचाव कर दिया। हालांकि ज्यातर लोगों का कहना है की केवल धक्का मुक्की हुई है।

भाजपा में बदलाव का असर दिखने लगा है। बदलाव का उत्साह सबसे ज्यादा पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं में दिखाई दे रही है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण गुरुवार को धरना_प्रदर्शन में दिखाई दिया। बेरोजगारी और बेरोजगारी भत्ता को लेकर भारतीय जनता युवा मोर्चा का गुरुवार को जंगी प्रदर्शन था। नेहरू चौक में भाजयुमो के अलावा सभी मोर्चा प्रकोष्ठ के पदाधिकारी और कार्यकर्ता एकत्रित हुए थे। ज्ञापन सौंपने के पहले सभा का आयोजन किया गया था। इस सभा में भाजयुमो के पदाकारियों को संबोधित करना था। लेकिन मंच पर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का कब्जा था। भाजयुमो के पदाधिकारियों ने जब मंच पर जाकर अपनी बात रखने का प्रस्ताव रखा तो सभी से खा गया की बोलना चाहते है वो अपना नाम लिखा। तभी वहां युवा मोर्चा के पदाधिकारी दुर्गेश पांडे वहां पहुंचे और अपना नाम लिखाना चाहा, लेकिन जिला अध्यक्ष रामदेव कुमावत ने उसे घुड़कते हुए मंच से नीचे उतार दिया। कुमावत के इस व्यवहार से वह आक्रोशित हो गया और गाली ग्लॉच कर दिया। युवा मोर्चा के पदाधिकारियों की समझाइस पर दुर्गेश मंच से नीचे उतर गया और तहसील कार्यालय कैंपस के अंदर जाकर बैठ गई। कैंपस के अंदर की भाजपा के कुछ विघ्नसंतोषी कार्यकर्ता भी बैठे हुए थे। इन कार्यकर्ताओं ने दुर्गेश पांडे को जमकर भड़काया। कुछ देर बाद सभा समाप्त हुई और सब ज्ञापन सौंपने के लिए कलेक्ट्रेट की ओर जाने लगे। इसी दौरान दुर्गेश पांडे सभी कार्यकर्ताओं को किनारे करते हुए आगे बढ़ा और कुमावत को धक्का दे दिया जिससे वह गिरते_गिरते बचे। संभालने के बाद कुमावत ने अपने चिर परिचित अंदाज में दुर्गेश को हड़काया। इसके बाद झगड़ा बढ़ गया झुमझटकी शुरू हो गई। वहां उपस्थित लोगो की माने तो दुर्गेश ने कुमावत को तीन झापड़ मार चुका था जब चौथा झापड़ मारने वाला था तो दाऊ शुक्ला नाम के भाजपा पदाधिकारी ने बीच बचाकर कुमावत को बचा लिया। बाद में कुमावत को दाऊ शुक्ला और दुर्गेश को दीपक सिंह लेकर अलग अलग लेजाकर मामला शांत कराया। हालांकि बहुत से प्रत्यक्षदर्शी कार्यकर्ताओं का कहना है की मारपीट नही हुई है लेकिन धक्का मुक्की जरूर हुई है। माना जा रहा है की इस घटना के बाद भाजपा में ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग उठ रही है।

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