नई दिल्ली। क्या आप जानते हैं पीएफ में पैसे जमा करने पर पीएफ खाता धारक को एक इंश्योरेंस भी मिलता है। यह लाइफ रिस्क पॉलिसी की तरह होता है और दुर्भाग्यवश खाता धारक की मृत्यु हो जाने पर उनके परिजनों की यह राशि मिलती है। कर्मचारी डिपोजिट लिंक्ड इंश्योरेंस योजना के तहत यह बीमा पीएफ खाता धारकों को दिया जाता है। कई नौकरी करने वाले लोग अपनी सैलरी से कुछ हिस्सा पीएफ के रुप में जमा करते हैं। पीएफ के रुप में जमा होने वाला पैसा आपको जरुरत के समय या रिटायरमेंट के वक्त में एक साथ ब्याज के साथ मिलता है। लेकिन, क्या आप जानते हैं पीएफ में पैसे जमा करने पर पीएफ खाता धारक को एक इंश्योरेंस भी मिलता है। यह लाइफ रिस्क पॉलिसी की तरह होता है और दुर्भाग्यवश खाता धारक की मृत्यु हो जाने पर उनके परिजनों की यह राशि मिलती है। दरअसल, कर्मचारी डिपोजिट लिंक्ड इंश्योरेंस योजना के तहत यह बीमा पीएफ खाता धारकों को दिया जाता है. इस योजना के तहत सब्सक्राइबर्स का एक बीमा करवाया जाता है, जो कर्मचारी की नौकरी के दौरान मृत्यु हो जाने पर मिलता है। बीमा की राशि का एकमुश्त भुगतान मृत्यु के बाद परिजनों को किया जाता है, जिससे उनके परिजनों को आर्थिक मदद मिल सके. ऐसे में जानते हैं पीएफ में जमा पैसों के अलावा कितने रुपये मिलते हैं और इससे जुड़े क्या निय है।इसमें कर्मचारी को 7 लाख रुपये तक का बीमा मिलता है। पहले यह राशि 6 लाख रुपये तक थी, जिसे पिछले साल ही बढ़ाकर 7 लाख रुपये कर दिया गया है। ईपीएफओ के एक एक्टिव कर्मचारी की अगर सेवा अवधि के दौरान मृत्यु हो जाती है तो उसके नॉमिनी को 7 लाख रुपये तक का एकमुश्त भुगतान किया जाता है। यह पैसे सभी को 7 लाख रुपये नहीं मिलते हैं, इसकी अलग तरह से गणना होती है।दरअसल, इस बीमा में मिलने वाली राशि पिछले 12 महीनों में मिले मासिक वेतन का 30 गुना होती है, लेकिन यह सात लाख से ज्यादा नहीं हो सकती है। ऐसे में आप 7 लाख तक इसका फायदा उठा सकते हैं। अब इसमें एक लाख रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है। ये पैसे एक्टिव कर्मचारी की मृत्यु पर परिजनों को मिलते हैं। परिजनों को यह पैसा एक्सीडेंटल या सामान्य मृत्यु के बाद मिल सकता है। इसके लिए कई दस्तावेज जमा करने होते हैं और उसके बाद क्लेम मिलता है। वैसे तो किसी की मृत्यु के बाद नॉमिनी या फिर कानूनी उत्तराधिकारी को यह पैसा मिलता है। इसके लिए उचित कागजी कार्रवाई करनी होती है। बता दें कि ईपीएफ में हमारा 12 फीसदी पैसा जमा होता है और उतना ही हमारे नियोक्ता द्वारा ईपीएफ और पेंशन में भी जमा किया जाता है। लेकिन, इसके अलावा भी नियोक्ता द्वारा कुछ योगदान किया जाता है। इसी के तहत EDLI योजना में नियोक्ता द्वारा 0.50 फीसदी योगदान किया जाता है जिसके तहत कर्मचारी की मृत्यु हो जाने पर उसके नॉमिनी या परिवार वालों को 6 लाख रुपये तक की बीमा राशि प्रदान की जाती है।
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