अंततः भाजपा ने माना की मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के प्रस्ताव पर ही 12 जातियों को एसटी वर्ग का लाभ मिला

बिलासपुर। प्रदेश के 12 जातियों को आदिवासी वर्ग की सूची में शामिल किए जाने को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच श्रेय लेने की होड़ लगी है। भाजपा के नेता कह रहे है की मोदीजी अनुमति नहीं देते तो 12 जातियों को सूची में शामिल नहीं किया जा सकता था जबकि कांग्रेस का कहना है कि जब प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल प्रस्ताव नहीं भेजते तो मोदीजी अनुमोदन किसका करते। इसी मामले को लेकर बिलासपुर के भाजपा कार्यालय में पार्टी के एक वरिष्ठ

प्रदेश के 12 जातियों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किए जाने को लेकर शुक्रवार को बिलासपुर के भाजपा कार्यालय में एक प्रेसवार्ता बुलाई गई थी। इस प्रेसवार्ता में पार्टी के अधिकृत प्रवक्ता ने इस फैसले को लेकर केंद्र की सरकार को श्रेय दिया और खा की मोदीजी की सरकार ने 12 जातियों को आदिवासी वर्ग की सूची में शामिल किया गया है। इसलिए पूरा श्रेय भाजपा के नेताओ को जाता है। उल्टा पार्टी के प्रावक्ता ने कांग्रेस को आदिवासी समाज का विरोधी होने का आरोप लगाया। जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या केंद्र की सरकार ने स्वयं संज्ञान लेकर 12 जातियों को आदिवासी वर्ग में शामिल किया है या राज्य सरकार के प्रस्ताव पर यह निर्णय लिया गया है। इस सवाल के जवाब में भाजपा के अधिकृत प्रवक्ता ने माना की राज्य सरकार के बिना प्रस्ताव भेजे केंद्र सरकार यह निर्णय नहीं ले सकती थी। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। लेकिन हमारे नेताओं ने भी इसके लिए प्रयास किए थे। नंदकुमार साय और अर्जुन मुंडा ने कई बार इस मुद्दे को उठाया था और पत्राचार किया था। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता ने प्रेसवार्ता में कहा की कांग्रेस सरकार में आदिवासी समाज के साथ हमेशा अन्याय हुआ। केन्द्र सरकार ने प्रदेश आदिवासियों के समग्र विकास को लेकर हमेशा सकारात्मक भूमिका का निर्वहन किया है। लेकिन प्रदेश के मुखिया अकेले श्रेय लेना चाहते हैं।
पत्रकारों को डॉ.बाधी ने बताया कि कई आदिवासी भाइयों की जाति में मात्रात्मक और लिपिकीय त्रुटि की शिकायत लम्बे समय थी। इसके चलते आदिवासी समाज के लोगों को शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा था। केन्द्र सरकार ने त्रुटियों को दूर करने का निर्देश दिया। त्रुटि दूर होने से आदिवासी समाज को शासन की योजनाओं का लाभ मिलने लगेगा।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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