बिलासपुर। इंदिरा प्रियदर्शिनी बैंक घोटाले का जिन्न एक बार फिर सामने आ गया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने फेसबुक पेज में एक वीडियो शेयर किया है। शेयर वीडियो बैंक के प्रबंधक उमेश सिन्हा का बताया गया है। जिसमें वो बता रहे है की रमन सिंह, बृजमोहन अग्रवाल, अमर अग्रवाल और रामविचार नेताम को पैसे दिए।
वीडियो के अनुसार बैंक के प्रबंधक बता रहे है की तब के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह को एक करोड़ रुपए दिए थे। इसके अलावा गृह और सहकारिता मंत्री होने के नाते रामविचार नेताम को एक करोड़, वित्त मंत्री होने के कारण अमर अग्रवाल को एक करोड़ रुपए और स्थानीय MLA होने के कारण बृजमोहन अग्रवाल को एक करोड़ रुपए दिए थे। उमेश सिन्हा बता रहे है की रमन सिंह को उन्होंने हाथों हाथ पैसे दिए है। इस वीडियो से यह भी स्पष्ट हो रहा है की रमन सिंह किसी के माध्यम से पैसा नहीं लेते थे। बड़ा अमाउंट हो तो खुद पैसे की लेनदेन करते थे। वीडियो में रीता तिवारी को 9 करोड़, संगीता शुक्ला को 2 करोड़, तत्कालीन डीजीपी राठौर को 2 करोड़ रुपए देने की बात सामने आ रही है। भूपेश बघेल द्वारा शेयर इस वीडियो को अभी तक हजारों लोग देख चुके है और पांच सौ से अधिक लोग शेयर कर चुके है।
इंदिरा प्रियदर्शनी बैंक को 14 साल पहले 2006 में आर्थिक अनियमितता सामने आने के बाद बंद कर दिया गया था.l। उसके बाद बैंक में 28 करोड़ रुपए से ज्यादा का घोटाला सामने आया था। बैंक में लगभग 22 हजार खातेदार थे और अचानक बैंक बंद हो जाने से खातेदारों में हड़कंप मच गया था। खातेदार अपना पैसा लेने बैंक के चक्कर लगाते रहे। जिसके बाद खातेदारों ने इंदिरा प्रियदर्शनी बैंक संघर्ष समिति बनाकर कोतवाली थाने में घोटाले की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। घोटाला उजागर होने के बाद बैंक ने अपने आप को डिफाल्टर घोषित कर दिया था।
गिरफ्तारीइंदिरा प्रियदर्शिनी बैंक घोटाले में 9 जनवरी 2007 को कोतवाली थाने में धोखाधड़ी की धारा 420, 468 के तहत मामला दर्ज किया गया था। जिसमें बैंक के प्रबंधन सहित संचालक मंडल के सदस्यों पर आरोप लगाया गया था। उस समय बैंक के संचालक मंडल में 19 से ज्यादा लोग सदस्य थे। जिसमें शहर के कई नामी परिवार की महिलाएं भी शामिल थी। संचालक मंडल में शामिल 11 सदस्य की भूमिका की जांच की गई। जिसके बाद पुलिस ने संचालक मंडल के 11 सदस्यों सहित बैंक के स्टाफ को गिरफ्तार किया था। इसमें कई आरोपी जमानत पर है और यह मामला अभी भी कोर्ट में चल रहा है।
तत्कालीन बैंक मैनेजर उमेश सिन्हा की नार्को टेस्ट की सीडी 14 साल बाद पिछले साल रायपुर कोर्ट में पेश की गई थी। जेएमएफसी कोर्ट में कोतवाली पुलिस ने बेंगलुरु फॉरेंसिक लैब से आई सीडी जमा की है। बैंक में 28 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आने के बाद कोतवाली पुलिस ने मैनेजर उमेश सिन्हा की नार्को टेस्ट कराई थी। नार्को टेस्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे किए थे।
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