बिलासपुर। पवन कुमार पटेल ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत किया है जिसमें उन्होंने राज्य सरकार के द्वारा पारित आदेश दिनांक 12.09.2022 को चुनौती दी है। 12.9.2022 के आदेश में राज्य सरकार ने याचिकाकर्ता को अपने अध्यक्ष के कार्यकाल के दौरान बिन्नी भाई पसरा मार्केट के टेंडर फाइनल नहीं होने के कारण छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 35 क के तहत अयोग्य करार देते हुए आगामी 5 वर्षों के लिए याचिकाकर्ता को नगरपालिका के पार्षद या अध्यक्ष पद के लिए निर्वाचन हेतु अयोग्य करार दिया है। अपने अधिवक्ता प्रतीक शर्मा के माध्यम से छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत कर यह तर्क दिया की 2015 में याचिकाकर्ता ने नगर पालिका अध्यक्ष महासमुंद का चुनाव जीता और 2017 में बिन्नी भाई पसरा मार्केट का टेंडर जारी हुआ। जिसमें पूर्व के वर्षों की आमदनी को देखते हुए ₹470000 शासकीय बेस रेट निर्धारित किया गया और टेंडर में अधिकतम बोली 430000 की आई। टेंडर कमिटी ने इसे सीधे स्वीकार करते हुए पीएसी के समक्ष रखने का निर्णय लिया क्योंकि उक्त शासकीय बेस रेट 470000 से कम थी। इसलिए याचिकाकर्ता ने राज्य शासन से मार्गदर्शन हेतु पत्र लिखा। उक्त प्रकरण में तत्कालीन मुख्य नगरपालिका अधिकारी को एवं याचिकाकर्ता को अधिनियम की धारा 1961 अधिनियम की धारा 41 क के अंतर्गत नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया। जिसका जवाब याचिका कर्ता ने प्रस्तुत कर दिया और तत्कालीन मुख्य नगरपालिका अधिकारी ने अपने जवाब में पी आई सी के समक्ष नेगोशिएशन का प्रस्ताव भूलवश नहीं रखने की बात स्वीकार की, परंतु तत्कालीन नगर पालिका अधिकारी के उक्त जवाब के बावजूद याचिकाकर्ता के खिलाफ मामला खत्म करने के बजाय आदेश दिनांक 12.09.22 के द्वारा याचिकाकर्ता को अयोग्य करार दिया गया और अगले 5 वर्षों तक पार्षद या अध्यक्ष के पद के निर्वाचन हेतु अयोग्य घोषित किया गया। अपनी बहस में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने यह तर्क प्रस्तुत किया की धारा 35 क के अंतर्गत कोई भी कार्यवाही नहीं की गई है एवं बिना किसी नोटिस के सीधे आदेश पारित कर दिया गया है। क्योंकि जो भी कार्यवाही याचिकाकर्ता के विरुद्ध की गई थी वह धारा 41 क के अंतर्गत प्रारंभ की गई थी न कि धारा 35 क के अंतर्गत इसलिए राज्य शासन द्वारा पारित आदेश 15.09. 22 अपास्त किए जाने योग्य है। याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि वर्ष 2019 में याचिकाकर्ता पुनः पार्षद चुना गया है और उसे काम नहीं करने दिया जा रहा है। मामले की सुनवाई के पश्चात आज दिनांक 07.11.22 को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने आदेश दिनांक 15.09.22 के प्रभाव एवं प्रचलन पर रोक लगा दी है और राज्य शासन एवं नगर पालिका महासमुंद को जवाब हेतु 4 हफ्तों का समय प्रदान किया है।
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